बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; कहा- बेहद शर्मनाक और सोची-समझी साजिश है
punjabkesari.in Thursday, Apr 02, 2026 - 12:19 PM (IST)
नेशनल डेस्क : पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारियों के 'घेराव' और उन्हें बंधक बनाए जाने की घटना ने देश की supreme court को नाराज कर दिया है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए इस पूरी घटना को न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने की एक 'सुनियोजित साजिश' करार दिया।
CJI ने देर रात तक की निगरानी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान खुलासा किया कि स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें खुद देर रात तक मामले की निगरानी करनी पड़ी। उन्होंने कहा, "जब मैंने रात में सख्त आदेश जारी किए, तब कहीं जाकर प्रशासन हरकत में आया। बंधक बनाए गए अधिकारी का 5 साल का बच्चा घर पर अकेला था। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अधिकारियों को सुरक्षा देने में राज्य मशीनरी पूरी तरह विफल रही।"
कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां: सबसे ध्रुवीकृत राज्य
SC ने पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए इसे देश का 'सबसे अधिक ध्रुवीकृत राज्य' बताया। चीफ जस्टिस ने एडवोकेट जनरल से कहा कि राज्य में हर मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या प्रशासन को लगता है कि अदालत को उपद्रवियों की पहचान नहीं है?
प्रशासनिक विफलता पर उठाए सवाल
अदालत ने मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी (DGP) सहित राज्य के आला अधिकारियों के आचरण को 'निंदनीय' बताया। इसके चलते दोपहर 3:30 बजे घेराव शुरू हुआ और तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित किया गया। रात 8:30 बजे तक भी बार-बार अनुरोध के बावजूद मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा डीजीपी और गृह सचिव को फोन किए जाने के बावजूद जिला मजिस्ट्रेट (DM) या एसपी मौके पर नहीं पहुँचे।
न्यायपालिका को चुनौती देने की कोशिश
बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह घटना केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि अदालत के अधिकारियों को डराने और चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की एक 'निर्लज्ज कोशिश' थी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि न्यायिक अधिकारियों को हतोत्साहित करने वाले ऐसे किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
