सेना के पास होंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से लैस हथियार, सरकार ने बनाई ये योजना

9/26/2019 7:44:42 PM

नेशनल डेस्कः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) तकनीक का इस्तेमाल आज हर क्षेत्र में हो रहा है। क्योंकि इसने जीवन के कई कार्यों को आसान बना दिया है। गूगल मैप या एलेक्सा वॉयस समेत अन्य कई जीवन उपयोगी डिवाइस में एआइ का प्रयोग हो रहा है। अब भारत सरकार रक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का प्रयोग करने जा रही है। कहा जा रहा है कि अगले दो वर्षों में सैनिकों के पास ऐसे हथियार होंगे जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से लैस होंगे।

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इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सेना, नीति आयोग और देश के कई बड़े तकनीकी शिक्षण संस्थान के विशेषज्ञ इस योजना का रोडमैप तैयार करने में जुटे हैं। अपनी इस योजना के विषय में जानकारी देने के लिए बुधवार को हिसार के आर्मी कैंट में सप्त शक्ति द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें सेना की साउथ वेस्टर्न कमांड से आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आलोक सिंह क्लेर उपस्थित रहे।

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भविष्य के युद्ध के लिए खुद को तैयार कर रही है सेना
चीन और पाकिस्तान से मिलती चुनौतियों से पार पाने के लिए भारत ने सेना को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस करने की योजना बनाई है। चीन तो बहुत पहले से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पर आगे बढ़ चुका है। ऐसे में भारत के लिए यह फैसला एक चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए सेना नीति आयोग, रिसर्च इंस्टीट्यूट और प्राइवेट सेक्टर के साथ काम करेगी। इसमें नीति आयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए रास्ता तैयार करने में जुट गया है, तो रिसर्च इंस्टीट्यूट और इंडस्ट्री तकनीक पर काम करेंगी और इस सब काम में सेना अपनी जरूरतों को एक्सपर्ट के साथ साझा करेगी। इन सभी के गठजोड़ से दो से तीन वर्ष में ऐसे हथियार तैयार होंगे जिनसे सटीक निशाना लगाना, दुश्मन और मित्र की पहचान, सर्विलांस क्षमता जैसे कई छोटे बड़े कार्य हो सकें। जिन कार्यों के लिए सेना को दुश्मन के इलाके में दाखिल होने जैसे जोखिम उठाना पड़ता है, वह भी कम किया जा सके। इसके साथ ही युद्ध जैसे हालातों में कैजुअलटी को कम किया जा सके। दरअसल सेना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से खुद को मैकेनाइज्ड वार के लिए तैयार कर रही है।

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बढ़ रहा है एआइ का दायरा
एआइ तकनीक का अर्थ है ऐसे कंप्यूटर कंट्रोल्ड रोबोट या सॉफ्टवेयर बनाना जो इंसानों की तरह सोच कर किसी समस्या का हल निकाल सकें। यह तकनीक कई कार्यों में मौजूदा समय में इंसान के कार्यों को आसान भी बना रही है। अब सेना के कार्यों में इसका प्रयोग किया जाना है। इसमें डिफेंस की मदद करने वाले ऐसे कई स्टार्टअप को केंद्र सरकार बढ़ावा दे रही है।

 


Author

Ravi Pratap Singh

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