दाल में काला ! ईरान जंग पर चीन-पाकिस्तान का ‘5 सूत्री प्लान’, शांति की पहल या गहरी चाल

punjabkesari.in Wednesday, Apr 01, 2026 - 03:06 PM (IST)

International Desk: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को रोकने के लिए चीन (China) और पाकिस्तान (Pakistan) ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। दोनों देशों ने मिलकर पांच सूत्रीय शांति प्रस्ताव पेश किया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करना और स्थिरता बहाल करना है। यह प्रस्ताव उस समय सामने आया जब पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने बीजिंग का दौरा किया और वहां चीन के विदेश मंत्री Wang Yi के साथ बैठक की। लेकिन  China और Pakistan के 5 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर सवाल उठ रहे हैं।

 

क्या है 5 सूत्री योजना?

इस प्रस्ताव में मुख्य रूप से ये बातें शामिल हैं:

  • तुरंत युद्धविराम (Ceasefire)
  • जल्द से जल्द शांति वार्ता शुरू करना
  • आम नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों की सुरक्षा
  • ऊर्जा, बिजली और परमाणु ढांचे पर हमले रोकना
  • अंतरराष्ट्रीय कानून और United Nations चार्टर का पालन

 
 दोनों देशों ने खासतौर पर Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर जोर दिया। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है। चीन ने यह भी बताया कि उसके तीन तेल टैंकर सुरक्षित रूप से इस जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं, जिसके लिए उसने संबंधित पक्षों का धन्यवाद किया।


चीन-पाकिस्तान की नीयत पर सवाल
चीन-पाकिस्तान की यह पहल कागज पर शांति की दिशा में एक कदम जरूर लगती है, लेकिन इसके पीछे की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं।  चीन और पाकिस्तान ने भले ही 5 सूत्रीय शांति योजना पेश की हो, लेकिन इस पहल को लेकर कई देशों और विश्लेषकों के बीच संदेह गहराता जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह वाकई शांति की कोशिश है या फिर एक रणनीतिक चाल। यह प्रस्ताव उस समय आया है जब United States और Iran के बीच संघर्ष चरम पर है। ऐसे में चीन और पाकिस्तान की पहल को कुछ लोग “टाइमिंग आधारित कूटनीति” मान रहे हैं, जिसका मकसद युद्ध रोकना नहीं बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका मजबूत करना हो सकता है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन लंबे समय से ईरान का बड़ा आर्थिक साझेदार रहा है और उस पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद तेल खरीदता रहा है। ऐसे में उसकी “निष्पक्ष मध्यस्थ” की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी आलोचना हो रही है। माना जा रहा है कि इस्लामाबाद, बीजिंग के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी के तहत इस पहल को आगे बढ़ा रहा है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में उसकी स्थिति मजबूत हो सके।

 

होर्मुज पर असली खेल और छिपा एजेंडा 
Strait of Hormuz को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। यह दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है, और यहां स्थिरता की बात करना जरूरी है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि चीन का असली मकसद अपने ऊर्जा हितों को सुरक्षित करना है, न कि केवल वैश्विक शांति।

 

  • ईरान के साथ आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते
  • अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाना
  • खुद को “शांति दूत” के रूप में पेश करना
  • वैश्विक कूटनीति में प्रभाव बढ़ाना

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Tanuja

Related News