लोअर बर्थ के नीचे सामान रखने पर किसका अधिकार? जानें रेलवे का स्लीपर से AC फर्स्ट क्लास तक का नियम
punjabkesari.in Saturday, Sep 05, 2026 - 08:33 AM (IST)
नई दिल्ली : ट्रेन में सफर के दौरान लोअर बर्थ के नीचे बैग रखने को लेकर यात्रियों के बीच अक्सर कहासुनी हो जाती है। कई लोग यह मानते हैं कि लोअर बर्थ का टिकट होने पर सीट के नीचे की पूरी जगह पर केवल उनका अधिकार है। हालांकि, भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, लोअर बर्थ के नीचे की जगह किसी एक यात्री की निजी संपत्ति नहीं है। आइए जानते हैं कि ट्रेन में सामान रखने के बारे में रेलवे के असल नियम क्या कहते हैं, ताकि अगली बार सफ़र करते समय आपको कोई परेशानी न हो।
तीनों यात्रियों का समान अधिकार:
रेलवे के साफ़ नियमों के अनुसार, भले ही आपके टिकट पर लोअर बर्थ लिखा हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सीट के नीचे की पूरी जगह पर सिर्फ़ आपका ही कब्ज़ा होगा। उस कूप या केबिन में सफ़र करने वाले मिडिल और अपर बर्थ के यात्रियों का भी उस जगह पर बराबर का अधिकार है। नियम कहता है कि लोअर बर्थ वाला यात्री अपनी सीट के नीचे अपना सामान रख सकता है, लेकिन साथ ही मिडिल और अपर बर्थ वाले यात्रियों को भी लोअर बर्थ के नीचे अपने बैग या सामान रखने की इजाज़त है। सभी को इस जगह का इस्तेमाल मिल-जुलकर करना होता है।
निःशुल्क सामान ले जाने की सीमा:
सभी यात्रियों की आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए, रेलवे ने सामान की एक सीमा भी तय की है। यात्रियों का सामान तय वज़न और साइज़ के अंदर होना चाहिए। रेलवे के नियमों के मुताबिक, बिना कोई अतिरिक्त शुल्क दिए
-स्लीपर क्लास: 40 किलोग्राम तक
-AC 3-टियर एवं 2-टियर: 40 से 50 किलोग्राम तक
-AC फर्स्ट क्लास: 70 किलोग्राम तक सामान ले जाने की इजाज़त है।
यात्रियों को यह भी हिदायत दी जाती है कि वे ज़रूरत से ज़्यादा जगह न घेरें ताकि साथ सफ़र करने वाले यात्रियों को कोई परेशानी न हो।
अगर ट्रेन में सामान रखने या जगह घेरने को लेकर किसी यात्री के साथ बहस या विवाद की स्थिति बनती है, तो झगड़े में पड़ने से बचना चाहिए। बहस करने के बजाय कोच के TTE से संपर्क करें, RailMadad ऐप पर शिकायत दर्ज करें या टोल-फ्री नंबर 139 पर कॉल करें। जिस पर रेलवे प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता है।
