अब चिली के पूर्व राजदूत ने US ऑपरेशन को बताया बहाना, कहा- “थ्रेशोल्ड पार हो गया” भारत से किया ये अनुरोध
punjabkesari.in Wednesday, Jan 07, 2026 - 01:36 PM (IST)
चिली के पूर्व राष्ट्रीय संपत्ति मंत्री और भारत में नवनियुक्त चिली राजदूत रहे जॉर्ज हेने ने अमेरिका की वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई की तीखी निंदा की है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला पर अमेरिकी ऑपरेशन अब तक की किसी भी हस्तक्षेप की तरह नहीं है और यह एक नया “थ्रेशोल्ड” पार कर गया है। हेने ने कहा कि पिछले कई सदी में अमेरिका ने लैटिन अमेरिका में कई बार हस्तक्षेप किया है, लेकिन यह पहला मौका है जब दक्षिण अमेरिकी मुख्यभूमि पर अमेरिकी सैन्य हमला और एक राष्ट्रपति की गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा, “यह हमला और कराकास जैसे तीन मिलियन आबादी वाले शहर पर बमबारी, फिर राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को उठाकर ले जाना यह सब एक नए युग की शुरूआत है। यह अनिश्चितता पैदा कर रहा है कि आगे क्या होगा।”
हेने ने यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया की “कमज़ोरी” पर भी संकेत दिया, कहा कि जगत इस नए बदलाव को गंभीरता से नहीं देख रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह एक प्रसिद्ध उदाहरण बनता है, तो अमेरिका किसी भी देश पर इसी तरह की कार्रवाई कर सकता है यहाँ तक कि दक्षिण अमेरिका के स्थिर लोकतंत्रों जैसे मेक्सिको और कोलंबिया पर भी। “मैं भारत से भी उम्मीद करता हूँ कि वह इस हमले की निंदा करे,” हेने ने कहा। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक राज्य द्वारा दूसरे राज्य के खिलाफ बल के इस्तेमाल पर रोक है, और केवल आत्मरक्षा जैसे बहुत सीमित मामलों में इसका अपवाद है। चूंकि वेनेजुएला द्वारा अमेरिका पर कोई हमला नहीं हुआ, इसलिए हेने इसे अवैध बताते हैं।
हेने ने ड्रग तस्करी को हमले का कारण बताये जाने को भी खारिज किया। उनका कहना है कि वेनेजुएला प्रमुख ड्रग उत्पादक या निर्यातक नहीं है, और वहाँ से किसी बड़ी संख्या में फेंटनाइल निर्यात किए जाने के सबूत नहीं हैं। उन्होंने कहा यह दावा “बोगस” है और वास्तविकता पर टिकता नहीं है। उधर, वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कराकास पर अमेरिकी हमले और मादुरो की गिरफ्तारी के बाद राष्ट्रव्यापी सात दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न केवल लैटिन अमेरिका के कई देशों ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी इस घोर सैन्य हस्तक्षेप को अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना बताया है। यह ऑपरेशन वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के दायरे में एक नया विवाद बना हुआ है, जिसका असर विदेश नीति, क्षेत्रीय सुरक्षा और विश्व व्यवस्था पर लंबे समय तक रहेगा।
