US and Israeli Strikes व खामेनेई की मौत पर वैश्विक नेताओं ने दी प्रतिक्रिया, दुनिया पूछ रही-अब आगे क्या ?
punjabkesari.in Sunday, Mar 01, 2026 - 11:51 AM (IST)
International Desk: तेहरान में हुए हमलों और ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबर के बाद पूरी दुनिया में एक ही सवाल गूंज रहा है क्या यह टकराव अब पूर्ण युद्ध में बदलेगा? क्या क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक सुरक्षा को प्रभावित करेगा? हालांकि हालात बेहद तनावपूर्ण हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नेताओं की प्रतिक्रियाएं अपेक्षाकृत संतुलित और संयमित रही हैं।
ट्रंप का बयान, UN की आपात बैठक
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने खामेनेई की मौत को ईरानी जनता के लिए “अपने देश की बागडोर वापस लेने का मौका” बताया। वहीं, United Nations Security Council ने हालात पर आपात बैठक बुलाई है, ताकि क्षेत्रीय शांति पर असर का आकलन किया जा सके।
यूरोप की संयमित अपील
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer, फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron और जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने संयुक्त बयान में अमेरिका और ईरान से बातचीत फिर शुरू करने की अपील की। मैक्रों ने स्पष्ट कहा कि फ्रांस को हमलों की पूर्व जानकारी नहीं थी और केवल सैन्य कार्रवाई से परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे हल नहीं होंगे। तीनों देशों ने ईरान के जवाबी हमलों की निंदा करते हुए कहा कि “ईरानी जनता को अपना भविष्य स्वयं तय करने देना चाहिए।”
अरब देशों और ओमान की प्रतिक्रिया
Arab League ने ईरान के हमलों को संप्रभुता का उल्लंघन बताया। सऊदी अरब, जॉर्डन, मोरक्को, संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों की आलोचना की। मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान ने कहा कि सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है और विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए।
रूस और चीन की कड़ी प्रतिक्रिया
Russia ने हमलों को “पूर्व नियोजित और बिना उकसावे की आक्रामकता” बताया और आरोप लगाया कि परमाणु कार्यक्रम की आड़ में सत्ता परिवर्तन की कोशिश हो रही है। China ने भी गहरी चिंता जताई और तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने तथा बातचीत बहाल करने की अपील की।
कनाडा-न्यूजीलैंड का समर्थन
कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने कहा कि ईरान का शासन क्षेत्र में अस्थिरता का स्रोत रहा है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री Christopher Luxon ने भी कहा कि किसी भी सरकार की वैधता जनता के समर्थन पर टिकी होती है।हालात बेहद नाजुक हैं। बयानबाजी भले तीखी हो, लेकिन अधिकांश देश खुलकर युद्ध का समर्थन करने से बच रहे हैं। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या पश्चिम एशिया एक व्यापक युद्ध की ओर बढ़ेगा या कूटनीति आखिरी क्षण में हालात संभाल लेगी।
नॉर्वे ने दी चेतावनी
नॉर्वे के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि अमेरिका-ईरान वार्ता विफल रही तो “एक नया, बड़ा युद्ध” हो सकता है। परमाणु निरस्त्रीकरण संगठन International Campaign to Abolish Nuclear Weapons ने हमलों को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए परमाणु हथियारों के विस्तार के खतरे की चेतावनी दी। यूरोपीय संघ ने सभी पक्षों से संयम और कूटनीति की अपील की है, ताकि “परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित” की जा सके।
