Inflation In India: ''कमाई अठन्नी और खर्चा रुपया'' जानिए 12 दिनों से महंगाई आम आदमी को कैसे लूट रही है? देखिए पूरी Report Card

punjabkesari.in Tuesday, May 26, 2026 - 04:43 PM (IST)

नेशनल डेस्क: देश में पिछले दो हफ्तों से कम समय के भीतर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में ऐसी बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इससे आम आदमी की जेब का खर्च बढ़ गया है। आम आदमी को पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, दूध, सोने- चांदी जैसे सभी क्षेत्रों से महंगाई की मार पड़ी है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित मिडिल क्लास हुई है।

12 दिन में 4 बार बढ़ीं ईंधन की कीमतें

बीते 12 दिनों में ईंधन की कीमतों में 4 बार बढ़ोतरी हुई है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के चलते तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। हालांकि, इस वैश्विक दबाव का सीधा खामियाजा आम वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। इसके अलावा CNG की कीमत में भी 4 बार बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी के बाद ऑटो और कैब चालकों का कहना है कि उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अब सिर्फ गैस भरवाने में ही खर्च हो रहा है, जिसके कारण कई संगठनों ने किराए में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी है।

रसोईघर का भी हिला बजट

दूध और राशन महंगे महंगाई की यह तपिश सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने घर की रसोई को भी अपनी चपेट में ले लिया है। कुछ प्रमुख डेयरी कंपनियों ने दूध की कीमतों में प्रति लीटर 2 से 4 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। इसके चलते सुबह की चाय से लेकर बच्चों के खान-पान और स्थानीय स्ट्रीट फूड तक, हर चीज की लागत बढ़ गई है।

PunjabKesari

शादियों के सीजन में सोना-चांदी खरीदना हुआ मुश्किल

सर्राफा बाजार से भी आम उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर नहीं है। शादियों का सीजन शुरू होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई तेजी और आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) के समीकरणों के कारण सोने-चांदी के दाम सातवें आसमान पर पहुंच गए हैं। ऐसे में मिडिल क्साल परिवारों के लिए शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदना एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया है।

ईएमआई और खर्च के बीच पिसी मिडिल क्लास

ईएमआई और खर्च के बीच पिसती मिडिल क्लास इस समय बड़े आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। एक तरफ जहां मकान, कार की ईएमआई, बच्चों की स्कूल फीस और बिजली के बिल जैसे तय खर्च जस के तस बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ रोजमर्रा की चीजों पर होने वाला खर्च अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। लोग अब अपनी बचत में से कटौती करने को मजबूर हैं।

आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान

राहत की उम्मीद फिलहाल कम आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं होते और वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक घरेलू बाजार में राहत मिलना मुश्किल है। हालांकि, सरकारी स्तर पर स्थिति पर नजर रखने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर आम उपभोक्ता को तत्काल कोई बड़ी राहत मिलती नहीं दिख रही है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

News Editor

Radhika

Related News