12 नहीं बल्कि 13 महीनों का रहेगा साल 2026, जानें कैसे बढ़ गया एक माह
punjabkesari.in Thursday, Nov 27, 2025 - 09:02 PM (IST)
नेशनल डेस्क: अंग्रेजी कैलेंडर में नया साल जनवरी से शुरू होता है, लेकिन हिंदू परंपरा में समय की गणना विक्रम संवत के अनुसार की जाती है। हर साल की शुरुआत चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से होती है। आने वाला वर्ष 2026, यानी विक्रम संवत 2083, कई मायनों में बेहद खास होने वाला है। बता दें कि अधिक मास जुड़ने की वजह से ज्येष्ठ माह लगभग 58–59 दिनों तक चलेगा। यही कारण है कि इस वर्ष पंचांग में 13 महीने होंगे- जो एक दुर्लभ खगोलीय और पंचांगीय घटना है।
इस साल घटेगा अनोखा घटनाक्रम- 2 ज्येष्ठ महीने!
विक्रम संवत 2083 में अधिक मास पड़ रहा है और वह भी ज्येष्ठ (जेठ) माह में। इसका सीधा अर्थ है:
एक नहीं, बल्कि दो-दो ज्येष्ठ महीने रहेंगे
- एक सामान्य ज्येष्ठ मास
- दूसरा अधिक ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम मास)
अधिक मास जुड़ने की वजह से ज्येष्ठ माह लगभग 58–59 दिनों तक चलेगा। यही कारण है कि इस वर्ष पंचांग में 13 महीने होंगे- जो एक दुर्लभ खगोलीय और पंचांगीय घटना है।
कब शुरू होगा अधिक ज्येष्ठ मास?
अधिक ज्येष्ठ मास
आरंभ: 17 मई 2026
समाप्ति: 15 जून 2026
सामान्य ज्येष्ठ मास
आरंभ: 22 मई 2026
समाप्ति: 29 जून 2026
यानी इस अवधि में दोनों महीने एक-दूसरे के साथ ओवरलैप भी करेंगे।
अधिक मास क्यों आता है?
हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्र दोनों की गति पर आधारित होता है। लेकिन दोनों के समय चक्र में अंतर होता है:
- सौर वर्ष चंद्र वर्ष से लगभग 11 दिन लंबा होता है।
- हर वर्ष यह अंतर बढ़ता जाता है।
- इस असंतुलन को संतुलित करने के लिए लगभग हर 32 महीने 16 दिन में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है।
अधिक मास का धार्मिक महत्व
अधिक मास को मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह माह शुभ कर्मों, दान-पुण्य, जप-तप, और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान कई लोग: पूजा-पाठ, व्रत, दान, आध्यात्मिक साधना।
