Phulera Dooj 2026: 19 फरवरी को अबूझ मुहूर्त का महासंयोग, महादेव और श्रीकृष्ण की कृपा से दूर होंगे सारे कष्ट

punjabkesari.in Tuesday, Feb 17, 2026 - 01:13 PM (IST)

नेशनल डेस्क। सनातन धर्म में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया यानी 'फुलेरा दूज' का स्थान अत्यंत विशेष है। इस साल 19 फरवरी 2026 को पड़ने वाला यह पर्व खुशियों, प्रेम और भक्ति का अनूठा संगम लेकर आ रहा है। खास बात यह है कि इस बार फुलेरा दूज का पर्व कुबेरेश्वर धाम में चल रहे भव्य रुद्राक्ष महोत्सव के मध्य पड़ रहा है जो इसकी महिमा को अनंत गुना बढ़ा देता है।

पौराणिक महत्व: जब मुरझाई प्रकृति फिर से खिल उठी

मान्यता है कि विरह की अग्नि में जल रही राधा रानी के दुख से जब ब्रजमंडल की वनस्पति सूखने लगी थी तब भगवान श्रीकृष्ण ने फाल्गुन द्वितीया को लौटकर फूलों से होली खेली थी। उनके स्पर्श से प्रकृति फिर से पल्लवित हो उठी। इसीलिए इसे फूलों का त्योहार कहा जाता है। यह दिन सिखाता है कि परमात्मा कभी अपने भक्त को निराश नहीं छोड़ते।

अबूझ मुहूर्त: बिना पंचांग देखे करें शुभ काम

फुलेरा दूज को ज्योतिष शास्त्र में अबूझ मुहूर्त माना गया है। इस दिन शादी, सगाई, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करने के लिए पंडित से मुहूर्त पूछने की जरूरत नहीं होती। इस दिन किया गया दान और जप कभी समाप्त नहीं होता।

कुबेरेश्वर धाम और फुलेरा दूज का संगम

सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में इन दिनों रुद्राक्ष महोत्सव की धूम है। रुद्राक्ष जो महादेव के अश्रु हैं और फुलेरा दूज जो मुस्कान के फूल हैं इन दोनों का मिलन भक्तों के लिए सौभाग्य की बात है। इस दिन महादेव को धतूरा चढ़ाने का विशेष महत्व है जो हमारे जीवन की कड़वाहट और बीमारियों को सोख लेता है।

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कष्टों से मुक्ति के लिए विशेष शिव उपाय:

यदि आप भी परेशानियों से घिरे हैं तो इस फुलेरा दूज (19 फरवरी) को ये सरल उपाय जरूर अपनाएं:

बीमारी से मुक्ति के लिए: पांच धतूरे लेकर कुंदकेश्वर महादेव का नाम जपते हुए शिवलिंग पर अर्पित करें। यह उपाय पुराने रोगों को जड़ से खत्म करने में सहायक माना जाता है।

विवाह में बाधा के लिए: यदि शादी में देरी हो रही है तो शिवलिंग पर माता अशोक सुंदरी के स्थान पर लाल चंदन से 7 बिंदी लगाएं।

मनोकामना पूर्ति के लिए: शाम के समय बेलपत्र के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं और उसमें एक फूल वाली साबुत लौंग अपनी कामना कहकर डाल दें।

व्यापार में उन्नति के लिए: एक कोमल फूल नंदी जी के दाहिने पैर के पास रखें और फिर उसे उठाकर शिवलिंग पर चढ़ा दें।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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