न किराया, न टेंशन! भारत में तेजी से बढ़ रहा 'Co-Living' का ग्लोबल ट्रेंड, बुजुर्गों को मिला पोते जैसा साथ और छात्रों को फ्री घर
punjabkesari.in Monday, Mar 23, 2026 - 12:52 PM (IST)
Intergenerational Co-living Trends : जापान और नीदरलैंड जैसे देशों की तर्ज पर अब भारत के महानगरों में भी पीढ़ियों के बीच की दूरी कम हो रही है। अकेले रहने वाले बुजुर्ग अपने घर का एक हिस्सा कॉलेज के छात्रों या वर्किंग प्रोफेशनल्स को दे रहे हैं। खास बात यह है कि यहां लेन-देन पैसों का नहीं बल्कि अपनों के साथ का है।
क्या है यह नया मॉडल?
इस व्यवस्था में छात्र को रहने के लिए कमरा मिलता है (अक्सर मुफ्त या बहुत कम दाम पर) और बदले में वह बुजुर्ग की मदद करता है।
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डिजिटल मदद: बुजुर्गों को स्मार्टफोन चलाना, ऑनलाइन बिल भरना या दवाइयां ऑर्डर करना सिखाना।
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भावनात्मक साथ: साथ बैठकर खाना खाना, पार्क में टहलना या सिर्फ बातें करना।
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सुरक्षा: इमरजेंसी में अस्पताल ले जाना या घर के छोटे-मोटे काम निपटाना।
सेहत पर जादुई असर (WHO की रिपोर्ट)
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के शोध बताते हैं कि युवाओं के साथ रहने से बुजुर्गों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है:
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तनाव में कमी: अकेलापन दूर होने से डिप्रेशन का खतरा कम होता है।
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तेज दिमाग: युवाओं के साथ चर्चा करने से दिमाग सक्रिय रहता है और डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) का जोखिम घटता है।
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युवाओं को फायदा: छात्रों को जीवन का अनुभव मिलता है और महंगे शहरों में रहने का खर्च 30-50% तक कम हो जाता है।
दुनिया से सीख: कहां-कहां है यह कल्चर?
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जापान: 'इंटरजेनरेशनल हाउसिंग' को सरकार प्रमोट करती है ताकि बुजुर्गों को सहारा मिले।
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नीदरलैंड: यहां नर्सिंग होम में छात्र फ्री रहते हैं शर्त सिर्फ इतनी है कि वे बुजुर्गों के साथ गेम खेलें या उनके साथ समय बिताएं।
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भारत के इन शहरों में बढ़ रहा क्रेज
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दिल्ली-गुरुग्राम: डिजिटल कामकाज में मदद के बदले छात्र बुजुर्गों के साथ रह रहे हैं।
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मुंबई: महंगे फ्लैट्स के विकल्प के रूप में युवा 'सीनियर होम' चुन रहे हैं, जहाँ सुरक्षा और सुकून दोनों हैं।
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बेंगलुरु-पुणे: आईटी हब होने के कारण यहां स्टार्टअप प्रोफेशनल्स इस मॉडल को अपना रहे हैं।
सावधानी भी जरूरी: इन 5 बातों का रखें ध्यान
बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों ने कुछ सुझाव दिए हैं:
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पुलिस वेरिफिकेशन: जिसे भी घर में रखें, उसका थाना वेरिफिकेशन अनिवार्य है।
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पहचान की पुष्टि: छात्र के कॉलेज या ऑफिस जाकर उसके बैकग्राउंड की जांच करें।
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ट्रायल पीरियड: कम से कम 15 दिन का ट्रायल रखें ताकि आपसी तालमेल पता चल सके।
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एग्रीमेंट: कानूनी सुरक्षा के लिए लिखित रेंट या को-लिविंग एग्रीमेंट जरूर कराएं।
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परिवार को जानकारी: अपने सगे-संबंधियों को नए सदस्य के बारे में पूरी जानकारी दें।


