सावधानी! ''फ्री'' सीट के चक्कर में कहीं भारी न पड़ जाए बेस फेयर, Airlines ने दी किराया बढ़ाने की चेतावनी
punjabkesari.in Saturday, Mar 21, 2026 - 11:50 AM (IST)
नेशनल डेस्क: Ministry of Civil Aviation के एक नए निर्देश ने विमानन क्षेत्र में हलचल मचा दी है। सरकार ने यात्रियों को राहत देने के लिए हर फ्लाइट में कम से कम 60% Free Seat Selection के दायरे में रखने का आदेश दिया है। हालांकि, IndiGo, Air India और SpiceJet जैसी बड़ी एयरलाइंस ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है।
आमने-सामने आई सरकार और एयरलाइंस
फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने इस संबंध में नागरिक उड्डयन सचिव को पत्र लिखकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। एयरलाइंस का तर्क है कि यह फैसला उनके बिजनेस मॉडल के खिलाफ है। एयरलाइंस के मुताबिक, 'एंसिलरी रेवेन्यू' (अतिरिक्त आय) जैसे सीट सिलेक्शन, एक्स्ट्रा बैगेज और मील चार्जेस उनके मुनाफे का बड़ा हिस्सा होते हैं।Middle East में चल रहे तनाव के कारण जेट फ्यूल की कीमतें और ऑपरेशनल कॉस्ट पहले ही आसमान छू रही हैं। FIA का कहना है कि सरकार को Market-based Pricing में दखल नहीं देना चाहिए।
आम यात्री की जेब पर क्या होगा असर?
हवाई कंपनियों ने चेतावनी दी है कि यदि 60% सीटें मुफ्त कर दी गईं, तो उन्हें होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए 'बेस फेयर' (Base Fare) बढ़ाना पड़ेगा। अगर एयरलाइंस बेस किराया बढ़ाती हैं, तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन यात्रियों को होगा जो बजट टिकट बुक करते हैं। यानी जो सुविधा 'फ्री' दिख रही है, उसकी कीमत अंततः टिकट के कुल दाम में जुड़ सकती है।
अभी कितना जेब ढीली करते हैं यात्री?
| सीट का प्रकार | अनुमानित शुल्क (₹) |
| सामान्य सीट चयन | ₹200 – ₹500 |
| विंडो/ऐजल सीट | ₹300 – ₹800 |
| फ्रंट रो / एक्स्ट्रा लेगरूम | ₹1,200 – ₹2,100 |
आगे क्या हो सकता है?
सरकार का तर्क है कि यात्रियों को अपनी पसंद की सीट चुनने के लिए अतिरिक्त भुगतान करने पर मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, जबकि एयरलाइंस इसे वित्तीय बोझ मान रही हैं। अब देखना यह होगा कि क्या मंत्रालय इस नियम में कोई बदलाव करता है या यात्री सस्ते में अपनी मनपसंद सीट पा सकेंगे।


