सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, बेताहाशा पेड़ों की कटाई पर चिंता जताई
punjabkesari.in Friday, Apr 04, 2025 - 04:51 PM (IST)

नेशनल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बेताहाशा पेड़ों की कटाई पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि कोई भी धर्म इस तरह से पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं देता है, और यह न केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से गलत है, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अस्वीकार्य है। यह टिप्पणी एक मंदिर प्रबंधन द्वारा अवैध रूप से पेड़ काटने के मामले में की गई, जहां कोर्ट ने पूछा कि क्या वन विभाग को प्रति पेड़ मुआवजा देने का कोई प्रस्ताव है और आप कितने पेड़ पुनः लगाएंगे।
कोर्ट की बेंच में जस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्जल भुयान शामिल थे। इस दौरान मंदिर प्रबंधन के वकील ने बताया कि 300 पेड़ पहले से लगाए जा चुके हैं, और वे 100 और पेड़ लगाने के लिए तैयार हैं, हालांकि वे यह भी बताते हैं कि मंदिर गरीब है और उनके पास पर्याप्त धन नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि आने वाले त्योहारों में मंदिर को जो चढ़ावा प्राप्त होता है, उसे वन विभाग को मुआवजे के रूप में दिया जा सकता है। जस्टिस ओका ने सुझाव दिया कि मंदिर प्रबंधन एक अंडरटेकिंग दे, जिसमें यह बताया जाए कि त्योहारों के दौरान मंदिर को कितना चढ़ावा मिलता है और उसे वन विभाग को मुआवजे के तौर पर दिया जाए। इस तरह से पेड़ों की कटाई के मामले को हल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पेड़ों को काटने की इतनी मजबूरी क्यों है, और क्या राज्य ने पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 अप्रैल की तारीख तय की।
यह मामला सिर्फ एक मंदिर के द्वारा अवैध पेड़ों की कटाई का नहीं है, बल्कि यह व्यापक रूप से पूरे देश में पेड़ों के संरक्षण और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के मुद्दे को उजागर करता है। इससे पहले भी, हैदराबाद यूनिवर्सिटी मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता जताई थी, और इसे गंभीर विषय बताया था। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण कदम है, जो इस दिशा में कार्रवाई करने की आवश्यकता को सामने लाती है और पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को फिर से याद दिलाती है।