Silver Rate : चांदी में आई तूफानी तेजी... एक दिन में इतने बढ़ गए दाम, सोना भी हुआ महंगा
punjabkesari.in Wednesday, Feb 18, 2026 - 05:32 PM (IST)
नेशनल डेस्क : हाल के दिनों में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद चांदी के दामों में तेज गिरावट देखी गई थी। हालांकि 18 फरवरी (बुधवार) को बाजार में एक बार फिर मजबूती लौटी। Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर चांदी 8,316 रुपये यानी करीब 3.63 प्रतिशत उछलकर 2,37,099 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इस तेजी के बाद निवेशकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या यह केवल अल्पकालिक सुधार (शॉर्ट टर्म रिकवरी) है या आगे भी कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है।
क्यों आई चांदी में अचानक तेजी?
चांदी की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया है जब हाल ही में सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली धातुओं की मांग में थोड़ी नरमी देखी गई थी। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों में आंशिक कमी, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच जेनेवा में हुई बातचीत के सकारात्मक संकेतों ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। हालांकि अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। वैश्विक आर्थिक हालात, युद्ध जैसे जोखिम और महंगाई की चिंता अभी भी बनी हुई है। यही वजह है कि सोना और चांदी जैसी कीमती धातुएं ऊंचे स्तर पर टिके हुए हैं।
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सोना भी हुआ महंगा
चांदी के साथ-साथ सोने में भी तेजी देखी गई। MCX पर सोना 1,848 रुपये यानी करीब 1.22 प्रतिशत बढ़कर 1,53,266 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार चीन और भारत में गोल्ड ETF की मांग मजबूत बनी हुई है। भारत ने जनवरी में सोने के आयात में भी बढ़ोतरी दर्ज की, जिससे बाजार को सपोर्ट मिला।
आगे क्या रह सकता है रुख?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल निवेशकों को संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए। अल्पकाल में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
चांदी और सोने की हालिया गिरावट के बाद आई यह तेजी आगे कितनी टिकेगी, यह कई कारकों पर निर्भर करेगा:
- वैश्विक आर्थिक संकेत
- अमेरिकी डॉलर की चाल
- ब्याज दरों में बदलाव
- भू-राजनीतिक घटनाक्रम
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है, तो सुरक्षित निवेश की मांग घट सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव आ सकता है। लेकिन दूसरी ओर, भौतिक मांग (फिजिकल डिमांड) कीमतों को सहारा देती है। चांदी का उपयोग आभूषणों के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर होता है। वहीं सोने की मांग शादी और त्योहारों के सीजन में बढ़ जाती है। भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में गिरावट के समय खरीदारी बढ़ना आम बात है, जो कीमतों को ज्यादा नीचे जाने से रोकती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
मौजूदा तेजी से यह संकेत जरूर मिलता है कि बाजार में खरीदारी लौटी है, लेकिन पूरी तरह तेजी का रुख मान लेना जल्दबाजी हो सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक लंबी अवधि की सोच के साथ निवेश करें और अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय संतुलित रणनीति अपनाएं। कहा जा सकता है कि, चांदी में फिर से मजबूती आई जरूर है, लेकिन आगे की दिशा वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
