RP singh ने पंजाब के मौजूदा वित्तीय हालातों पर चिंता जताई
punjabkesari.in Saturday, May 23, 2026 - 12:52 PM (IST)
नेशनल डेस्क: BJP के नेशनल स्पोक्सपर्सन आरपी सिंह ने पंजाब की मौजूदा फाइनेंशियल हालत पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की लीडरशिप में पंजाब एक गंभीर एडमिनिस्ट्रेटिव और फाइनेंशियल संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब 2022 में AAP सत्ता में आई थी, तब पंजाब पर करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, लेकिन इकॉनमी को स्टेबल करने के बजाय, यह बोझ साल 2027 तक 4.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि साल 2026-27 में पंजाब को कर्ज चुकाने के लिए 42,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं, जिसमें से करीब 29,000 करोड़ रुपये सिर्फ इंटरेस्ट पर खर्च होंगे। बीजेपी लीडर ने आरोप लगाया कि राज्य की इनकम का एक बड़ा हिस्सा पुराने लोन और इंटरेस्ट चुकाने में जा रहा है, जिससे डेवलपमेंट के कामों पर खर्च लगातार कम हो रहा है।
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Punjab is heading toward a full-blown fiscal and administrative crisis under CM @BhagwantMann and the AAP government.
— RP Singh National Spokesperson BJP (@rpsinghkhalsa) May 23, 2026
When AAP came to power in 2022, Punjab’s debt was already dangerously high at nearly ₹2.7 lakh crore. But instead of stabilising the economy, the debt trajectory… pic.twitter.com/TPmW9eBDte
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उन्होंने ये गंभीर मुद्दे उठाए:
- सैलरी और पेंशन में देरी: सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को अपने बकाए के लिए इंतज़ार करना पड़ रहा है।
- संस्थानों की खराब हालत: अमृतसर में हिंदू कॉलेज और पंजाब यूनिवर्सिटी जैसे ऐतिहासिक संस्थान फंड की कमी के कारण संकट का सामना कर रहे हैं।
- पेंडिंग स्कीमें: शगुन स्कीम के लाभार्थियों, MNREGA वर्कर्स और ASHA वर्कर्स को उनका बकाया पैसा नहीं मिल रहा है।
आर.पी. सिंह ने AAP सरकार के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार विज्ञापन और राजनीतिक दिखावे पर करोड़ों रुपये बर्बाद कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि अगर कर्ज लगातार बढ़ रहा है, तो पंजाब का पैसा कहां जा रहा है? फाइनेंशियल इमरजेंसी जैसे हालात? हालांकि उन्होंने साफ किया कि टेक्निकली, आर्टिकल 360 के तहत फाइनेंशियल इमरजेंसी लागू नहीं होती, लेकिन मौजूदा हालात उसी तरफ इशारा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों को यह जानने का हक है कि राज्य की फाइनेंशियल बर्बादी को विज्ञापनों के पर्दे के पीछे क्यों छिपाया जा रहा है।
