पंजाब की ‘शिक्षा क्रांति’ पर सवाल उठाते हुए BJP प्रवक्ता RP Singh बोले- राज्य में पूरी तरह फेल हुआ 'सिसोदिया मॉडल'
punjabkesari.in Tuesday, May 19, 2026 - 06:31 PM (IST)
नेशनल डेस्क: पंजाब में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य सरकार द्वारा प्रचारित ‘शिक्षा क्रांति’ और दिल्ली मॉडल की जमीनी हकीकत अब सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति से उजागर होती नजर आ रही है। इन्हीं सवालों को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने पंजाब के सीएम भगवंत मान और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस पर निशाना साधा है। सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा कि राज्य में बहुचर्चित “मनीष सिसोदिया मॉडल” अब पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। इसी के साथ उन्होंने अलग- अलग सरकारी स्कूलों के हालात भी बयां किए हैं।
लुधियाना के डब्बा स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल में 1000 से अधिक छात्र जर्जर भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल की छतों में दरारें हैं, दीवारों में सीलन है और जगह-जगह प्लास्टर गिर रहा है। आरोप है कि वर्षों से इस भवन की मरम्मत तक नहीं करवाई गई। वहीं पटियाला जिले के पातड़ां के पास धग्गा गांव में स्कूल भवन असुरक्षित होने के कारण बच्चों को मंदिरों और अस्थायी स्थानों पर पढ़ाया जा रहा है। नाराज अभिभावकों ने उचित स्कूल भवन की मांग को लेकर पटियाला–पातड़ां हाईवे तक जाम कर दिया।
<
.@BhagwantMann & @harjotbains's much-hyped “Manish Sisodia Model” of education is collapsing under the weight of ground reality in Punjab.
— RP Singh National Spokesperson BJP (@rpsinghkhalsa) May 19, 2026
The government spends crores advertising a fake “Sikhya Kranti”, but Punjab’s government schools are exposing the truth every single day.… pic.twitter.com/LrqO8bvIcN
>
जालंधर के बस्ती पीर दाद इलाके में भी हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं। यहां कक्षा पहली से पांचवीं तक के करीब 300 बच्चे भीषण गर्मी में टिन शेड के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं, क्योंकि 12 कक्षाओं के लिए केवल 5 कमरे उपलब्ध हैं।
इसके अलावा राज्य के कई सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने बाद भी किताबें नहीं पहुंची हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कक्षा 8वीं, 9वीं, 10वीं और 12वीं की पुस्तकें अब तक कई स्कूलों में उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भारी कमी भी बड़ा मुद्दा बन चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार पंजाब में 6400 से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई गई है। कई स्कूलों और डिस्पेंसरी से लिए गए पानी के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल बताए गए हैं। विपक्ष का आरोप है कि दिल्ली से लाया गया तथाकथित “शिक्षा मॉडल” अब पंजाब में पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। उनका कहना है कि बच्चों को बेहतर स्कूल, शिक्षक, किताबें और सुरक्षित माहौल देने के बजाय सरकार केवल विज्ञापनों और प्रचार अभियानों में व्यस्त है।
