JPSC के 3 सदस्यों का इस्तीफा, छात्र और सरकार के बीच 4 घंटे से अधिक की बैठक; कहां फंसा पेंच?
punjabkesari.in Sunday, Aug 09, 2026 - 07:01 PM (IST)
रांची: झारखंड में 14वीं JPSC पीटी परीक्षा को लेकर विवाद के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के तीन सदस्यों के इस्तीफे की खबर सामने आई है। आयोग की सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। तीनों ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेज दिया है। गवर्नर हाउस ने कंफर्म किया है कि सदस्यों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। JPSC सदस्यों के इस्तीफे की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब एक ओर परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं और दूसरी ओर राज्य सरकार के साथ उनकी मांगों को लेकर बातचीत का तीसरा दौर चल रहा था। ऐसे में इस्तीफे ने पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
Governor Santosh Kumar Gangwar has accepted the resignations submitted by Ajita Bhattacharya, Anima Hansda, and Jamal Ahmed from their posts as members of the Jharkhand Public Service Commission, in light of the recommendation made by the State Government: Lok Bhavan, Jharkhand pic.twitter.com/vXK0yzXh3J
— ANI (@ANI) August 9, 2026
छात्रों और सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत
झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के बीच रविवार को तीसरे दौर की बातचीत हुई। रांची के स्टेट गेस्ट हाउस में हुई इस बैठक में छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी विभिन्न मांगें सरकार के सामने रखीं। यह बैठक चार घंटे से अधिक चली है। सरकार की ओर से दावा किया गया कि उसने आंदोलन कर रहे JPSC-JSSC अभ्यर्थियों की करीब 98 फीसदी मांगें मान ली हैं। हालांकि, जिस एक प्रमुख मांग पर सरकार सहमत नहीं हुई, वही छात्रों के आंदोलन का सबसे अहम मुद्दा बनी हुई है।
CGL परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं मानी
राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि सरकार ने छात्रों की कई मांगों पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि CID के जरिए 14वीं JPSC और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों में सामने आई कथित आपराधिक गड़बड़ियों की जांच कराई जाएगी। छात्रों की ओर से कथित वित्तीय लेन-देन की ED से जांच, फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन और 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने जैसी मांगें भी रखी गई हैं। हालांकि, CGL परीक्षा रद्द करने की मांग को सरकार ने स्वीकार नहीं किया। सरकार का तर्क है कि यह परीक्षा सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की निगरानी में आयोजित हुई थी। परीक्षा रद्द करने के बजाय सरकार ने एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है। लेकिन छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
जिस मांग पर अटका पूरा मामला
छात्रों और सरकार के बीच बातचीत में अधिकांश मांगों पर सहमति बनने के बावजूद एक अहम मुद्दे पर गतिरोध कायम है। यही वह मांग है जिसे छात्र लंबे समय से उठाते आ रहे हैं और जिस पर सरकार फिलहाल पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में JPSC के तीन सदस्यों का इस्तीफा इस पूरे विवाद के बीच एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस्तीफे की खबर उस वक्त सामने आई, जब छात्र प्रतिनिधिमंडल सरकार के साथ बातचीत कर रहा था।
#WATCH | Ranchi, Jharkhand: JPSC-JSCC aspirants' protest | After meeting with the aspirants' delegation, Jharkhand Minister Sudivya Kumar Sonu says, "Following three days of talks and extensive consultations, and acting on the instructions of CM Hemant Soren, the government… https://t.co/0UIgrcahhE pic.twitter.com/HIcbgVjUqr
— ANI (@ANI) August 9, 2026
आंदोलन के बीच इस्तीफे से बढ़ी हलचल
JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों पर कार्रवाई समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। इसी बीच JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे ने परीक्षा विवाद को नया मोड़ दे दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के बीच अगली बातचीत में क्या समाधान निकलता है और आयोग के तीन सदस्यों के इस्तीफे का 14वीं JPSC परीक्षा विवाद पर क्या असर पड़ता है।
