शीर्ष अदालत पहुंचा JPSC का मामला, PIL में स्वतंत्र जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग
punjabkesari.in Saturday, Aug 08, 2026 - 04:45 PM (IST)
नई दिल्ली: झारखंड सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। परीक्षा प्रक्रिया में उठ रहे सवालों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता हरीशरण देवगन ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। याचिका में परीक्षा की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने, कथित अनियमितताओं की जांच CBI या स्वतंत्र समिति से कराने और विवादित प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने की मांग की गई है। याचिका में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की भी मांग की गई है, ताकि परीक्षा से जुड़े आरोपों की समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से जांच हो सके।
OMR से रिजल्ट तक पूरी व्यवस्था के ऑडिट की मांग
PIL में केवल परीक्षा रद्द करने की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की जांच और स्वतंत्र ऑडिट की मांग उठाई गई है। इसमें OMR शीट की स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की पूरी व्यवस्था को जांच के दायरे में रखने की अपील की गई है। याचिकाकर्ता ने यह पता लगाने की मांग की है कि परीक्षा में कथित तौर पर सही तरीके से सफल हुए उम्मीदवारों और गलत तरीके से लाभ पाने वाले उम्मीदवारों के बीच अंतर करने के लिए उपलब्ध रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं।
48 सवालों का मामला बना विवाद का केंद्र
परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद एक सफल उम्मीदवार की OMR कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर सामने आने के दावे के बाद विवाद ने तूल पकड़ा। आरोप लगाया गया कि उम्मीदवार ने पेपर-1 में 100 में से केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे, इसके बावजूद वह सफल उम्मीदवारों की सूची में शामिल हो गया। हालांकि, यह आरोप जांच का विषय है और किसी उम्मीदवार के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
A plea before the Supreme Court seeking an independent probe into alleged irregularities in the Jharkhand Civil Services Prelims 2025. It also seeks cancellation of the April 19 exam, fresh prelims, and an independent committee headed by a retired judge.
— ANI (@ANI) August 8, 2026
It further seeks… pic.twitter.com/Dtd5JOumJ0
लगातार उठ रहे हैं सवाल
इसी मामले को लेकर परीक्षा की OMR प्रक्रिया और मूल्यांकन व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। JPSC की ओर से सफल उम्मीदवारों से Paper-I और Paper-II की OMR कार्बन कॉपी मांगे जाने की जानकारी भी सामने आई है, ताकि रिकॉर्ड का मिलान कर स्थिति स्पष्ट की जा सके।
सारे रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की भी मांग
याचिका में परीक्षा से जुड़े सभी कागजी और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का आदेश देने की मांग की गई है। इनमें OMR शीट, उम्मीदवारों की कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर की, अटेंडेंस शीट, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, परीक्षा केंद्रों की रिपोर्ट, स्कैनिंग रिकॉर्ड और रिजल्ट तैयार करने से संबंधित डिजिटल डेटा समेत अन्य रिकॉर्ड शामिल हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब तक कथित अनियमितताओं की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक परीक्षा से जुड़े किसी भी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि बाद की जांच में साक्ष्यों की कमी न हो।
सड़क पर छात्र, अदालत में परीक्षा विवाद
परीक्षा को लेकर विवाद के बीच रांची में छात्रों का आंदोलन भी जारी है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में बदलाव समेत अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि मामला केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के भविष्य का है जिन्होंने सरकारी सेवा में चयन के लिए लंबे समय तक तैयारी की है।
