Visa Job Cuts: AI पर बढ़ते फोकस के बीच Visa ने 2,600 नौकरियां खत्म कीं, भारत के कर्मचारी भी चपेट में

punjabkesari.in Wednesday, Aug 05, 2026 - 02:29 PM (IST)

नई दिल्ली: भारत में Visa के कुछ कर्मचारियों के लिए 29 जुलाई की सुबह एक ऐसे ईमेल के साथ शुरू हुई, जिसकी उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह करीब 4 से 5 बजे के बीच कई कर्मचारियों को नौकरी खत्म होने का ईमेल मिला। जब तक कई लोग अपने काम के लिए तैयार हुए, तब तक उनकी नौकरी जा चुकी थी। यह कदम Visa की वैश्विक छंटनी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी लगभग 2,600 पद खत्म कर रही है। यह उसके कुल कर्मचारियों का करीब 7 प्रतिशत है।

हालांकि, इस खबर की सबसे बड़ी बात सिर्फ छंटनी का आंकड़ा नहीं है। असली कहानी यह है कि Visa अब किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। कंपनी की नई रणनीति के केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है और इसका असर भारत के बड़े टेक वर्कफोर्स पर भी साफ दिखाई दे रहा है। भारत में Visa के 3,500 से अधिक कर्मचारी हैं। कंपनी के प्रमुख टेक्नोलॉजी और कॉर्पोरेट सेंटर बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद में स्थित हैं। हालांकि, अभी तक Visa ने यह नहीं बताया है कि भारत में कितने कर्मचारी इस छंटनी से प्रभावित हुए हैं।

भारत में क्या पड़ा असर?
भारत में हुई छंटनी कंपनी की रीस्ट्रक्चरिंग का सबसे चर्चित हिस्सा बन गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 29 जुलाई की सुबह होने से पहले ही कई कर्मचारियों को नौकरी खत्म होने का ईमेल भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि भारत की 28 सदस्यीय एक टीम में से 10 कर्मचारियों की नौकरी चली गई। छंटनी सिर्फ जूनियर कर्मचारियों तक सीमित नहीं रही। सीनियर डायरेक्टर, इंजीनियरिंग मैनेजर और कई वर्षों से कंपनी से जुड़े अनुभवी कर्मचारी भी इसकी चपेट में आए। प्रभावित कर्मचारियों को सेवरेंस पैकेज और 15 से 30 दिनों का नोटिस पीरियड दिया गया। हालांकि, कुछ कर्मचारियों का कंपनी सिस्टम तक एक्सेस कुछ ही दिनों में बंद कर दिया गया और उनसे लैपटॉप व आईडी कार्ड भी वापस ले लिए गए। 

Visa इतनी बड़ी छंटनी क्यों कर रहा है?
Visa का कहना है कि वह अपने कारोबार को अधिक प्रभावी बनाना चाहता है और संसाधनों को उन क्षेत्रों में लगाना चाहता है, जहां भविष्य में ज्यादा ग्रोथ की संभावना है। इस रणनीति में AI की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। कंपनी के CEO रायन मैकइनर्नी पहले भी कह चुके हैं कि Visa अब सिर्फ कर्मचारियों की मदद करने वाले AI टूल्स तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी तेजी से एजेंटिक AI पर काम कर रही है। ऐसे AI सिस्टम जो इंसानी निगरानी के साथ कई काम खुद कर सकें। यही वजह है कि अब सवाल केवल यह नहीं रह गया है कि कर्मचारी AI की मदद से तेजी से काम कर पाएंगे या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि क्या वही काम अब पहले से कम कर्मचारियों के साथ किया जा सकेगा।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस छंटनी का सबसे ज्यादा असर कंपनी की टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट टीमों पर पड़ा है। वित्त वर्ष 2025 के अंत तक Visa में करीब 34,100 कर्मचारी थे। ऐसे में लगभग हर 14 कर्मचारियों में से एक कर्मचारी इस वैश्विक छंटनी का हिस्सा बना है।

कारोबार में संकट नहीं, रणनीति में बदलाव
यह समझना जरूरी है कि Visa की यह छंटनी किसी कारोबारी संकट का नतीजा नहीं है। इसके उलट, कंपनी का प्रदर्शन लगातार मजबूत बना हुआ है और उपभोक्ता खर्च में भी स्थिरता देखने को मिली है। Visa का ट्रांजैक्शन-आधारित बिजनेस मॉडल भी उसे पारंपरिक बैंकों और लेंडर्स की तुलना में कम क्रेडिट जोखिम देता है। यानी यह फैसला कारोबार बचाने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों के हिसाब से वर्कफोर्स को फिर से तैयार करने के लिए लिया गया है।

भारत के संदर्भ में यह बदलाव और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक टेक कंपनियों ने भारत में बड़े इंजीनियरिंग और ऑपरेशंस सेंटर बनाए हैं, जिससे लाखों टेक प्रोफेशनल्स को रोजगार मिला है। Visa भी इसी मॉडल का हिस्सा है। भारत में उसके बड़े टेक्नोलॉजी सेंटर हैं, जहां हजारों कर्मचारी इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट और कॉर्पोरेट भूमिकाओं में काम करते हैं। इसलिए यह छंटनी भारतीय टेक वर्कफोर्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या दूसरी वैश्विक कंपनियां भी AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह मानने लगेंगी कि पहले जितना काम अब कम कर्मचारियों से कराया जा सकता है।

अच्छा काम करने वाले भी सुरक्षित नहीं
Visa में हुई इस छंटनी का एक और पहलू कर्मचारियों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। पूर्व कर्मचारी अर्नब दास ने X पर दावा किया कि उनके पूर्व मैनेजर, जो एक प्रोडक्ट को शुरू से अंत तक संभाल रहे थे और जिनकी परफॉर्मेंस रेटिंग भी शानदार थी, उन्हें भी नौकरी से निकाल दिया गया। उनकी पोस्ट से यह संकेत मिलता है कि मौजूदा दौर में सिर्फ अच्छा प्रदर्शन भी नौकरी की पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता।

सिर्फ Visa नहीं, पूरी इंडस्ट्री बदल रही है
Visa अकेली कंपनी नहीं है जो AI और नई रणनीति के तहत अपने वर्कफोर्स में बदलाव कर रही है।  पूरी पेमेंट इंडस्ट्री इसी तरह के बदलाव से गुज़र रही है। मास्टरकार्ड (Mastercard) ने इस साल की शुरुआत में अपने ग्लोबल वर्कफ़ोर्स में लगभग 4 प्रतिशत की कटौती करने की योजना की घोषणा की थी। कंपनी का कहना था कि वह रणनीतिक प्राथमिकताओं पर निवेश को फिर से केंद्रित करना चाहती है। फिनटेक कंपनी ब्लॉक (Block) ने भी फरवरी में अपने वर्कफ़ोर्स का लगभग आधा हिस्सा, यानी करीब 4,000 नौकरियां कम करने की योजना की घोषणा की थी। कॉर्पोरेट जगत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेज़न (Amazon) ने लगभग 16,000 कॉर्पोरेट पदों को खत्म करने की योजना की घोषणा की। क्लाउडफ़ेयर (Cloudflare) ने 1,100 से ज़्यादा नौकरियां कम करने की योजना बनाई। एटलासियन (Atlassian) ने AI के हिसाब से अपने वर्कफ़ोर्स को बदलने के लिए लगभग 1,600 नौकरियां कम करने की घोषणा की। इसी तरह, स्टैंडर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered) ने भी कहा कि वह AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच चार सालों में कॉर्पोरेट-फ़ंक्शन के 15 प्रतिशत पदों को खत्म करने की योजना बना रही है।
 
छंटनी पर बात करते हुए, SP जैन स्कूल ऑफ ग्लोबल मैनेजमेंट के असिस्टेंट डीन और असिस्टेंट प्रोफेसर उमेश कोठारी का कहना है कि AI का तेज़ी से बढ़ता इस्तेमाल वर्कप्लेस को बदल रहा है। अब काम करने का तरीका सिर्फ़ टास्क-बेस्ड (काम पर आधारित) नहीं रह गया है, बल्कि यह तेज़ी से जजमेंट (निर्णय लेने की क्षमता), प्रॉब्लम-सॉल्विंग (समस्या सुलझाने) और डिसीजन-मेकिंग (फ़ैसला लेने) पर आधारित होता जा रहा है... ऐसे वर्कप्लेस में जहां टेक्नोलॉजी और भूमिकाएँ लगातार बदलती रहेंगी, नई चीज़ें सीखने, पुरानी चीज़ें भुलाने और नए संदर्भों में ज्ञान का इस्तेमाल करने की क्षमता ही आखिरकार करियर में मज़बूती बनाए रखने का सबसे बड़ा ज़रिया बनेगी। 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Anu Malhotra

Related News