स्थानीय भाषाओं की फिल्मों के लिए उम्मीद लेकर आए नए रीजनल टीवी चैनल और OTT प्लेटफॉर्म
punjabkesari.in Wednesday, Jul 29, 2026 - 11:58 AM (IST)
नेशनल डेस्क : नेटफ्लिक्स और प्राइम वीडियो जैसे विदेशी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और बड़े ब्रॉडकास्टर अब सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों को खरीदने में सावधानी बरत रहे हैं। इससे बड़े स्टार्स वाली फिल्मों के खरीदार तो मिल जाते हैं, लेकिन तमिल, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी और गुजराती जैसी भाषाओं की कम और मध्यम बजट वाली फिल्में अक्सर सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद भी बिक नहीं पातीं। ऐसे में सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) द्वारा तमिल जनरल एंटरटेनमेंट चैनल 'सोनी विझा' और 'सोनी विझा HD' लॉन्च करना, साथ ही टीवी और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग पर रीजनल फिल्मों को बढ़ावा देना और गुजराती एंटरटेनमेंट कंपनी 'JOJO Lad' जैसी कंपनियों का फिल्मों की खरीद बढ़ाना, रीजनल फिल्ममेकर्स के लिए अच्छी खबर है।
नए रीजनल चैनलों के आने से प्रोग्रामिंग और फिल्मों की खरीद में नया निवेश आता है जिससे कंटेंट इकोसिस्टम मजबूत होता है और प्रोड्यूसर्स के लिए कमाई के नए मौके बनते हैं। साथ ही रीजनल कहानियों को अपने घरेलू बाजारों से बाहर भी दर्शक मिल रहे हैं। SPNI के साउथ रीजन के चीफ कंटेंट ऑफिसर राजारमन सुंदरम ने कहा, 'कोई नया ब्रॉडकास्टर या प्लेटफॉर्म सिर्फ एक और खरीदार नहीं जोड़ता, बल्कि यह रीजनल कंटेंट के बाजार का विस्तार करता है।'
उन्होंने कहा कि फिल्मों की खरीद के और रास्ते खुलने से प्रोड्यूसर्स को नए आइडिया पर काम करने का भरोसा मिलता है, खासकर ऐसी फिल्मों पर जो पारंपरिक स्टार-केंद्रित फिल्में नहीं हैं, लेकिन जिनकी कहानी बहुत मजबूत है। SPNI के 'सोनी विझा' लॉन्च करने और अपने साउथ एंटरटेनमेंट पोर्टफोलियो का विस्तार करने के साथ फिल्में उनके कंटेंट का एक अहम हिस्सा होंगी।
मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर के एक्सपर्ट और पार्टनर चंद्रशेखर मंथा ने कहा कि रीजनल भाषाओं की फिल्मों की खरीद OTT प्लेटफॉर्म और लीनियर ब्रॉडकास्टर दोनों के लिए एक रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है। यह बड़े बजट वाले हिंदी प्रोडक्शन का एक किफायती विकल्प है और इससे दर्शकों का अच्छा जुड़ाव भी मिलता है। जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ सालों में रीजनल फिल्मों की खरीद का बाजार कहीं अधिक समझदारी भरा हो गया है।
ओडिया प्लेटफॉर्म 'AAO NXT' के फाउंडर और CEO कौशिक दान ने कहा कि बाजार में एक वास्तविक सुधार हो रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर कम बजट वाली गैर-हिंदी फिल्मों पर पड़ रहा है। "महामारी के दौर में जब प्लेटफॉर्म हर चीज को बढ़ी हुई कीमतों पर खरीद रहे थे, वह दौर अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। नेशनल OTT प्लेटफॉर्म अब सोच-समझकर फिल्में चुन रहे हैं, और उनकी पसंद में या तो बड़े स्टार्स होते हैं या फिर ऐसी फिल्में जो सिनेमाघरों में पहले ही सफल साबित हो चुकी हैं। दास ने कहा कि इससे कम और मध्यम बजट वाली रीजनल फिल्मों को बहुत नुकसान हो रहा है।
छोटी फिल्मों के लिए नए रीजनल चैनल और OTT प्लेटफॉर्म अब सेकेंडरी मार्केट के बजाय प्राइमरी मार्केट बनते जा रहे हैं। आज कम बजट वाली तमिल, ओडिया या असमिया फिल्म के लिए, एक खास रीजनल प्लेटफॉर्म का होना अक्सर लागत वसूलने और फिल्म रिलीज न हो पाने के बीच का अंतर तय करता है।'
