Chandra Grahan 2026 : 3 मार्च को रंग खेलना पड़ सकता है भारी, प्रेमानंद जी महाराज ने भक्तों को क्यों दी चेतावनी?
punjabkesari.in Friday, Feb 27, 2026 - 02:31 PM (IST)
नेशनल डेस्क: होली के त्योहार को वृंदावन के विख्यात संत श्री प्रेमानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को एक गंभीर संदेश दिया है। उन्होंने पंचांग की गणना और खगोलीय घटनाओं का हवाला देते हुए 3 मार्च को रंग खेलने से बचने की सलाह दी है। क्योंकि इस साल 3 मार्च यानि की होली पर चंद्र ग्रहण लगेगा। इसके चलते लोगों के बीच भी होली खेलने को लेकर काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
क्यों 3 मार्च को उत्सव मनाना है वर्जित?
शास्त्रों और पंचांग के अनुसार, साल 2026 में होली का गणित सामान्य वर्षों से भिन्न है। 2 मार्च की शाम को पूर्णिमा तिथि के साथ होलिका दहन संपन्न होगा, वहीं अगले दिन यानी 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक काल का साया रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले ही सूतक काल का शुरु हो जाता है। प्रेमानंद जी महाराज ने साफ किया है कि सूतक के दौरान किसी भी प्रकार का उत्सव, पूजा-पाठ या शोर-शराबा करना अनुचित है। उनके अनुसार, यह समय उल्लास का नहीं बल्कि संयम और ईश्वर की भक्ति का है। इस दौरान उत्सव मनाना महापाप की श्रेणी में आ सकता है।

होली पर बन रहा है दुर्लभ और नकारात्मक संयोग
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस साल की होली पर ग्रहों का एक दुर्लभ और नकारात्मक संयोग बन रहा है। ज्योतिषियों का मानना है कि यह संयोग मानसिक तनाव, दुर्घटनाओं और आपसी विवादों को बढ़ावा दे सकता है। इस दौरान विशेष रूप से नशे से दूर रहने और वाहन सावधानी से चलाने की सलाह दी गई है, क्योंकि चोट लगने की प्रबल संभावना बनी रहेगी।
3 नहीं, 4 मार्च को मनाय जाएगा होली का जश्न
इतिहास में ऐसे मौके कम ही आते हैं जब होलिका दहन और धूलेंडी (रंगों की होली) के बीच एक पूरे दिन का अंतर हो। ग्रहण के दोष और सूतक काल से बचने के लिए इस बार रंगों वाली होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।

भक्तों के लिए विशेष निर्देश:
-
ग्रहण के प्रभाव और अंगारक योग की नकारात्मकता को कम करने के लिए मंत्र जाप और दान-पुण्य करें।
-
सूतक काल शुरू होने से पहले ही खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते डाल दें।
-
शास्त्रों की मर्यादा का पालन करते हुए 4 मार्च को ही सुरक्षित और हर्षोल्लास के साथ होली खेलें।
