बंगाल में राष्ट्रपति का अपमान पर पीएम मोदी ने ममता सरकार को घेरा, बोले- शर्मनाक है यह व्यवहार!
punjabkesari.in Wednesday, Mar 11, 2026 - 12:51 PM (IST)
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव उस वक्त एक नए चरम पर पहुंच गया जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने हालिया दौरे के दौरान राज्य प्रशासन के रवैये पर सार्वजनिक रूप से गहरा खेद प्रकट किया। इस मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटनाक्रम को संवैधानिक गरिमा का उल्लंघन बताते हुए ममता सरकार की तीखी आलोचना की।
प्रोटोकॉल उल्लंघन और अव्यवस्था के आरोप
उत्तर बंगाल में आयोजित 9वें 'इंटरनेशनल संथाली कॉन्क्लेव' में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति ने साझा किया कि उन्हें इस कार्यक्रम की अनुमति मिलने में काफी बाधाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने प्रोटोकॉल की अनदेखी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनके आगमन पर राज्य सरकार का कोई भी प्रतिनिधि या स्वयं मुख्यमंत्री उनकी अगवानी के लिए उपस्थित नहीं था। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम स्थल को अंतिम समय पर बदलने और वहां बुनियादी सुविधाओं (शौचालय व मंच की खराब स्थिति) के अभाव को लेकर भी आयोजकों ने नाराजगी जताई।
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This is shameful and unprecedented. Everyone who believes in democracy and the empowerment of tribal communities is disheartened.
— Narendra Modi (@narendramodi) March 7, 2026
The pain and anguish expressed by Rashtrapati Ji, who herself hails from a tribal community, has caused immense sadness in the minds of the people… https://t.co/XGzwMCMFrT
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ममता मेरी छोटी बहन जैसी: राष्ट्रपति
फांसीदेवा के बिधाननगर में आदिवासी समुदाय को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा, "शायद प्रशासन ने यह मान लिया था कि दूर-दराज के इलाके में लोग नहीं जुटेंगे और राष्ट्रपति खाली कुर्सियों को संबोधित करके लौट जाएंगी।" मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए उन्होंने उदारता दिखाई और कहा कि ममता उनकी छोटी बहन की तरह हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की संभावित नाराजगी के बावजूद उनके मन में किसी के प्रति कोई शिकायत नहीं है।
पीएम मोदी और भाजपा का कड़ा रुख प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस घटना को "शर्मनाक और अभूतपूर्व" करार दिया। उन्होंने कहा कि टीएमसी सरकार ने राष्ट्रपति—जो स्वयं आदिवासी समाज का गौरव हैं—के प्रति असम्मान दिखाकर सारी सीमाएं लांघ दी हैं। वहीं, भाजपा नेता अमित मालवीय ने इसे संवैधानिक व्यवस्था का पतन बताते हुए राज्य की प्रशासनिक मशीनरी पर सवाल खड़े किए।
