Cancer Alert: बिना लक्षण दिए चुपचाप शरीर में बढ़ रहे हैं ये खतरनाक कैंसर, समय रहते जांच से बच सकती है जान

punjabkesari.in Sunday, Jan 25, 2026 - 07:04 PM (IST)

नेशनल डेस्कः अक्सर लोग मानते हैं कि गंभीर बीमारी होने पर शरीर पहले ही तेज दर्द या स्पष्ट लक्षणों के जरिए चेतावनी दे देता है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, कैंसर के कुछ प्रकार ऐसे होते हैं जो सालों तक बिना किसी ठोस लक्षण के शरीर में चुपचाप बढ़ते रहते हैं। यही वजह है कि जब बीमारी की पहचान होती है, तब तक वह खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी होती है। ओवरी, पैंक्रियाज और फेफड़ों का कैंसर ऐसे ही साइलेंट किलर माने जाते हैं, जो समय रहते पकड़ में न आने पर जानलेवा साबित हो सकते हैं।

महिलाओं के लिए ‘साइलेंट किलर’ बना डिम्बग्रंथि का कैंसर

डिम्बग्रंथि (ओवरी) का कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा नजरअंदाज किए जाने वाले कैंसरों में शामिल है। इसके शुरुआती लक्षण बेहद मामूली होते हैं—जैसे पेट का हल्का फूलना, जल्दी पेट भर जाना, गैस की समस्या या निचले पेट में हल्की बेचैनी। अधिकतर महिलाएं इन लक्षणों को सामान्य पाचन समस्या या पीरियड्स से जुड़ी परेशानी मानकर अनदेखा कर देती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आंकड़े बताते हैं कि ओवरी कैंसर के करीब दो-तिहाई मामले तब सामने आते हैं, जब बीमारी तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंच चुकी होती है और पेट के अन्य हिस्सों में फैल जाती है।

पैंक्रियाज कैंसर: सबसे घातक साइलेंट कैंसर

अग्न्याशय यानी पैंक्रियाज का कैंसर दुनिया के सबसे खतरनाक कैंसरों में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि शुरुआती दौर में यह लगभग कोई लक्षण नहीं देता। न दर्द, न पीलिया और न ही कोई गंभीर पाचन समस्या दिखाई देती है।
ज्यादातर मामलों में मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचता है, जब तेज पेट दर्द, अचानक वजन कम होना या पीलिया जैसे लक्षण सामने आते हैं। तब तक सर्जरी के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं। इसी कारण पैंक्रियाज कैंसर के बहुत कम मरीज पूरी तरह ठीक हो पाते हैं।

फेफड़ों का कैंसर

फेफड़ों का कैंसर दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है। इसके शुरुआती संकेत अक्सर बेहद हल्के होते हैं जैसे लंबे समय तक बनी रहने वाली हल्की खांसी, थोड़ा-सा सांस फूलना या लगातार थकान। खासकर धूम्रपान करने वाले लोग इन लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।
लगभग 70 प्रतिशत मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब कैंसर तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंच चुका होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते जांच और पहचान हो जाए, तो कई मामलों में जान बचाई जा सकती है।

 


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Content Editor

Sahil Kumar

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