Childhood Cancer: लगातार बुखार, थकान और चेहरा पीला पड़ना बच्चों में हो सकते हैं ब्लड कैंसर के संकेत, न करें नजरअंदाज

punjabkesari.in Wednesday, Mar 11, 2026 - 09:08 AM (IST)

Cancer Screening For Kids: बचपन का कैंसर वयस्कों के कैंसर की तुलना में कम होता है, लेकिन यह इतना दुर्लभ भी नहीं है कि इसे नज़रअंदाज़ किया जाए। आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल 50,000 से 75,000 बच्चे कैंसर की चपेट में आते हैं। हालांकि यह डरावना लग सकता है, लेकिन विज्ञान ने इतनी प्रगति कर ली है कि समय पर पहचान होने से 80% से अधिक बच्चों को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

सबसे बड़ी चुनौती बीमारी नहीं, बल्कि जागरूकता की कमी है। माता-पिता अक्सर शुरुआती संकेतों को सामान्य फ्लू या बढ़ती उम्र का दर्द समझकर टाल देते हैं।

चेतावनी के संकेत: कब हो जाना चाहिए सतर्क?

डॉक्टरों के अनुसार, यदि कोई लक्षण 2 सप्ताह से अधिक समय तक बना रहता है या बार-बार लौटता है, तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए:

  • असामान्य गांठें: गर्दन, बगल, पेट या कमर में बिना किसी दर्द वाली गांठ या सूजन।

  • त्वचा में बदलाव: शरीर पर नीले निशान पड़ना, मसूड़ों या नाक से अचानक खून आना, या त्वचा पर छोटे लाल धब्बे दिखना।

  • हड्डियों और जोड़ों का दर्द: अगर बच्चा चलते समय लंगड़ा रहा है या रात में जोड़ों के दर्द के कारण उसकी नींद खुल जाती है।

  • ऊर्जा की कमी: लगातार थकान, चेहरा पीला पड़ना और बिना किसी ठोस कारण के वजन का कम होना।

  • न्यूरोलॉजिकल लक्षण: सुबह के समय तेज़ सिरदर्द और उसके साथ उल्टी होना, या चलने-फिरने में संतुलन खोना।

  • आंखों की चमक: यदि फ्लैश वाली फोटो में बच्चे की पुतली में सफेद चमक (White Reflex) दिखाई दे, तो यह दुर्लभ आई-कैंसर का संकेत हो सकता है।

कैंसर के प्रकार और उनके विशिष्ट लक्षण

कैंसर का प्रकार प्रमुख लक्षण
ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) बार-बार बुखार, संक्रमण, पीलापन और आसानी से चोट लगना।
लिंफोमा गर्दन या बगल में सख्त गांठें जो समय के साथ बढ़ती जाती हैं।
ब्रेन ट्यूमर सिरदर्द, दृष्टि में बदलाव और सुबह के समय उल्टी होना।
सॉलिड ट्यूमर पेट में असामान्य सूजन या कठोर गांठ महसूस होना।

माता-पिता के लिए जरूरी कदम

यदि आपको ऊपर दिए गए लक्षणों में से कोई भी दिखाई दे, तो घबराने के बजाय सही दिशा में कदम उठाएं:

  1. देरी न करें: लक्षणों के हफ्तों या महीनों तक खिंचने का इंतज़ार न करें।

  2. विशेषज्ञ की सलाह: तुरंत एक बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) से मिलें।

  3. बुनियादी जांच: डॉक्टर की सलाह पर ब्लड टेस्ट (CBC) और इमेजिंग टेस्ट (जैसे अल्ट्रासाउंड या एक्स-रे) कराएं।

 


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Content Editor

Anu Malhotra

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