Online Gaming Addiction: ऑनलाइन गेमिंग की लत बच्चों के लिए बन रही खतरा, रील्स एडिक्शन से बिगड़ रही मानसिक सेहत
punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 03:46 PM (IST)
नेशनल डेस्क: मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल ने बच्चों की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला दिया है। जहां एक ओर ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया मनोरंजन का साधन बने हैं, वहीं दूसरी ओर इनकी लत कई परिवारों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। हाल के एक दर्दनाक मामले ने इस खतरे को फिर से सामने ला दिया है, जिसमें मोबाइल गेम की लत से जुड़ी घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया।
गाजियाबाद की दुखद घटना
3 फरवरी 2026 की रात उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन बहनों ने इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान गंवा दी। उनकी उम्र 16, 14 और 12 वर्ष बताई गई। शुरुआती जांच में सामने आया कि वे लंबे समय से एक मोबाइल गेम में व्यस्त थीं और उसी से जुड़े एक चुनौतीपूर्ण कार्य के कारण यह कदम उठाया गया।
पुलिस को एक नोट भी मिला, जिससे संकेत मिलता है कि मोबाइल उनके जीवन का मुख्य हिस्सा बन चुका था। ऐसे मामले अलग-अलग राज्यों में भी सामने आ चुके हैं। कर्नाटक में भी एक किशोर द्वारा गेम से जुड़े चैलेंज के चलते आत्मघाती कदम उठाने की खबर सामने आई थी। इन घटनाओं ने अभिभावकों और विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया है।
बढ़ती लत और आंकड़े
भारत में करोड़ों लोग ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े हैं और युवा वर्ग इसका बड़ा हिस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में किशोर हर सप्ताह कई घंटे गेम खेलने में बिताते हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गेमिंग की लत से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिनमें तनाव, व्यवहार में बदलाव और भावनात्मक अस्थिरता शामिल है।
बच्चों के दिमाग पर असर
डॉक्टरों के मुताबिक गेम जीतने या लक्ष्य हासिल करने पर दिमाग में आनंद से जुड़े हार्मोन सक्रिय होते हैं, जो धीरे-धीरे लत का रूप ले सकते हैं। अधिक समय स्क्रीन पर बिताने से चिड़चिड़ापन, नींद की कमी, पढ़ाई में रुचि कम होना और सामाजिक दूरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। रिपोर्टों के अनुसार कम उम्र में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां बढ़ने में डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग भी एक कारण माना जा रहा है।
सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभाव
लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जुड़ा पाया गया है, जैसे —
चिंता और अकेलापन
नींद से जुड़ी परेशानी
अवसाद
आंखों और गर्दन में दर्द
ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
इसके अलावा लगातार स्क्रीन देखने से सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, आंखों में जलन, मोटापा और जीवनशैली से जुड़ी अन्य बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
बचाव और जागरूकता की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को पूरी तरह रोकने के बजाय संवाद और समझ जरूरी है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें, समय सीमा तय करें और उन्हें खेलकूद या अन्य रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रोत्साहित करें। डिजिटल दुनिया का संतुलित उपयोग ही बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत को सुरक्षित रखने का सबसे बेहतर तरीका है।
