कोरियन गेम का टास्क बना मौत की वजह? 9वीं मंजिल से कूदीं 3 बहनें, क्या आपके बच्चे को भी है गेमिंग की लत
punjabkesari.in Wednesday, Feb 04, 2026 - 10:57 AM (IST)
नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसी हृदयविदारक खबर आई है जिसने हर किसी को हिलाकर रख दिया है। एक ही परिवार की तीन मासूम बहनों ने मोबाइल गेम के प्रति अपने जुनून और पारिवारिक पाबंदियों के चलते मौत को गले लगा लिया।
गाजियाबाद की रिहायशी सोसाइटी में आधी रात को मातम
यह दर्दनाक वाकया गाजियाबाद की 'भारत सिटी' टाउनशिप में बुधवार, 4 फरवरी की देर रात घटित हुआ। करीब रात के दो बजे, तीन सगी बहनों ने अपनी बिल्डिंग की नौवीं मंजिल से छलांग लगा दी। इन बहनों की उम्र महज 12, 14 और 16 साल थी। इस खौफनाक कदम ने न केवल उनके परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि डिजिटल दौर में बच्चों की मानसिक स्थिति पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑनलाइन गेमिंग का जानलेवा जुनून
शुरुआती जांच में पुलिस ने पाया है कि तीनों लड़कियां मोबाइल पर गेम खेलने की बुरी तरह आदी हो चुकी थीं। बताया जा रहा है कि वे 'कोरियन लवर गेम' नामक किसी ऑनलाइन खेल में डूबी रहती थीं। इस लत की शुरुआत कोरोना काल के दौरान हुई थी जब स्कूल बंद होने के कारण बच्चों के हाथ में मोबाइल ज्यादा समय तक रहने लगा था। धीरे-धीरे खेल का यह शौक एक सनक में तब्दील हो गया और उन्होंने स्कूल जाना भी लगभग छोड़ दिया था।
माता-पिता की रोकटोक बनी सुसाइड की वजह
बेटियों की इस बिगड़ती आदत और पढ़ाई से बढ़ती दूरी को देखकर माता-पिता अक्सर उन्हें टोकते थे। परिजनों की कोशिश थी कि बच्चे मोबाइल छोड़कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। पुलिस का मानना है कि गेम खेलने पर लगाई गई इसी पाबंदी से नाराज होकर तीनों बहनों ने एक साथ इतना आत्मघाती कदम उठाया। हालांकि, प्रशासन अभी भी मामले की गहराई से तफ्तीश कर रहा है ताकि घटना की असल कड़ियां जोड़ी जा सकें।
बढ़ती डिजिटल लत और मानसिक सेहत पर खतरा
आज के समय में बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ना एक गंभीर समस्या बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल गेम्स की लत बच्चों को चिड़चिड़ा और एकाकी बना देती है। नींद की कमी और परिवार से दूरी उन्हें मानसिक तनाव की ओर धकेलती है। यह घटना समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के लिए कितना घातक हो सकता है।
कैसे रखें बच्चों को इस खतरे से सुरक्षित
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए माता-पिता को बेहद धैर्य और समझदारी दिखानी होगी। अचानक मोबाइल छीनने या मारपीट करने के बजाय बच्चों से संवाद बढ़ाना जरूरी है। उन्हें बाहरी खेलों, संगीत या किताबों जैसे रचनात्मक कामों की ओर प्रेरित करना चाहिए। फोन में 'पैरेंटल कंट्रोल' सेटिंग्स का उपयोग करके यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि बच्चा क्या देख रहा है और कितनी देर तक। सबसे महत्वपूर्ण है बच्चों के साथ क्वालिटी समय बिताना और उनके मन की बात को समझना, ताकि वे तकनीक के जाल में फंसने के बजाय अपनों पर भरोसा करें।
