सावधान! आपकी मोबाइल स्क्रीन दे रही है साइलेंट स्ट्रेस, जानिए कैसे 24*7 ऑनलाइन रहना आपके दिल के लिए है खतरा

punjabkesari.in Monday, Feb 02, 2026 - 05:48 PM (IST)

नेशनल डेस्क: आज की दुनिया में स्क्रीन हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी हैं। हम दिनभर मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के सामने रहते हैं और अक्सर यह महसूस तक नहीं करते कि हमारा कितना समय इन डिवाइसों के सामने बीत जाता है। काम, मैसेज, सोशल मीडिया रील्स, खबरें और नोटिफिकेशन सब कुछ अब एक ही स्क्रीन में सिमट गया है। धीरे-धीरे यह पूरी दिनचर्या डिजिटल रोशनी में घुलकर सामान्य महसूस होने लगता है, और साथ ही जुड़ा तनाव भी हमें नॉर्मल सा लगने लगता है।

स्क्रीन स्ट्रेस कब बन जाता है लाइफस्टाइल?
मोबाइल देखते हुए खाना खाना, परिवार के साथ बैठकर नोटिफिकेशन चेक करना और देर रात तक स्क्रीन पर कुछ आखिरी देखना अब आम आदत बन गई है। ये आदतें सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शरीर में उतर जाती हैं। लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने से ब्लड प्रेशर बढ़ना, दिल की धड़कन का अनियमित होना, एंग्जायटी अटैक, लगातार थकान, सिरदर्द और नींद की समस्याएं सामने आ सकती हैं। कुछ मामलों में विशेषज्ञों ने लंबे डिजिटल एक्सपोज़र को गंभीर दिल की बीमारियों और अचानक मेडिकल इमरजेंसी से भी जोड़ा है।


क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठने से शरीर की मूवमेंट कम हो जाती है और ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ जाता है। इसका असर मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और खराब कोलेस्ट्रॉल पर पड़ता है, जो दिल की बीमारियों के लिए बड़ा रिस्क फैक्टर बन सकते हैं। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जिससे नींद खराब होती है। खराब नींद खुद ही हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा देती है।


नोटिफिकेशन भी बढ़ा रहे हैं दिल पर दबाव 
लगातार नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया का इस्तेमाल शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ाता है। समय के साथ यह ब्लड प्रेशर को ऊपर ले जाता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है। रिसर्च से यह भी पता चला है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम, खासकर टीवी देखने की आदत, आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकती है। अक्सर लोग थकान और तनाव को सिर्फ बिजी लाइफ या मजाक के हिस्से के रूप में मान लेते हैं, लेकिन डिजिटल स्ट्रेस धीरे-धीरे शरीर पर असर डालता है और अचानक किसी एक पल में इसके परिणाम दिखाई नहीं देते।


शरीर देता है संकेत जिस नजरअंदाज कर देते हैं लोग 
अगर स्क्रीन टाइम से सेहत प्रभावित हो रही है, तो शरीर संकेत देने लगता है। लगातार थकान, नींद की खराब गुणवत्ता, बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर, वजन बढ़ना, फोन या कंप्यूटर से बेचैनी और फिजिकल एक्टिविटी में कमी इसके आम संकेत हैं। डिजिटल स्ट्रेस इसलिए खतरनाक है क्योंकि यह दिखने में नॉर्मल लगता है, लेकिन शरीर इसे लगातार दबाव की तरह लेता है। लंबे समय तक यह दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को सामान्य स्थिति में लौटने नहीं देता।


दिल को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
डॉक्टरों के अनुसार, डिजिटल लाइफ और दिल की सेहत को संतुलित रखने के लिए छोटे बदलाव बहुत जरूरी हैं। हर 30 से 40 मिनट में खड़े होकर थोड़ा चलना या स्ट्रेच करना, सोने से 1–2 घंटे पहले स्क्रीन से दूरी, हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी और सोशल मीडिया से ब्रेक लेना दिल की सेहत के लिए लाभदायक साबित हो सकता है। इस तरह, लगातार स्क्रीन पर रहने वाली हमारी आदतें सिर्फ थकान और तनाव नहीं बढ़ातीं, बल्कि दिल और संपूर्ण स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालती हैं। समय रहते सावधानी और स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण से डिजिटल स्ट्रेस से बचा जा सकता है।


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Content Editor

Mansa Devi

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