SIR प्रक्रिया में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी: Supreme Court
punjabkesari.in Monday, Feb 09, 2026 - 06:17 PM (IST)
नेशनल डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं देगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि वह इस मामले में आवश्यक आदेश या स्पष्टीकरण जारी करेगी। पीठ ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। इनमें राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल है, जिसमें एसआईआर अभ्यास के दौरान मतदाता सूची से "बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने" की आशंका जाहिर की गई है।

पीठ ने कहा, "हम किसी को भी एसआईआर प्रक्रिया में बाधा डालने की अनुमति नहीं देंगे। राज्यों को यह बात स्पष्ट हो जानी चाहिए।" शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे का संज्ञान लिया, जिसमें कुछ उपद्रवियों पर एसआईआर संबंधी नोटिस को जलाने का आरोप लगाया गया है। उसने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। निर्वाचन आयोग ने कहा कि उपद्रवियों के खिलाफ अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "यह संदेश जाना चाहिए कि भारत का संविधान सभी राज्यों पर लागू होता है।" शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से निर्वाचन आयोग को ग्रुप-बी के 8,505 अधिकारियों की सूची उपलब्ध कराए जाने का संज्ञान लिया। उसने कहा कि इन अधिकारियों को एसआईआर प्रक्रिया में प्रशिक्षित और नियोजित किया जा सकता है।
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पीठ ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में संशोधन के सिलसिले में अंतिम निर्णय हमेशा मतदाता सूची अधिकारियों द्वारा ही लिया जाएगा। उसने कहा कि इन 8,505 अधिकारियों की नियुक्ति का तरीका और कामकाज निर्वाचन आयोग द्वारा तय किया जाएगा। सुनवाई के दौरान ममता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने एसआईआर प्रक्रिया में सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और बड़े पैमाने पर योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर आशंकाएं व्यक्त कीं। दीवान ने पीठ से कहा, "हम नहीं चाहते कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर लोगों के नाम हटाए जाएं।"
