SIR पर CEC से मिलीं ममता: बोलीं- बंगाल को बनाया जा रहा निशाना; आयुक्त को बताया अहंकारी और झूठा
punjabkesari.in Monday, Feb 02, 2026 - 06:44 PM (IST)
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। सोमवार, 2 फरवरी 2026, को ममता बनर्जी 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली में मुख्य चुनाव आयोग के कार्यालय पहुंचीं और इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं।
इस प्रतिनिधिमंडल में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी, वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के साथ-साथ SIR से प्रभावित परिवारों के सदस्य भी शामिल थे। टीम में दो बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), ऐसे लोग शामिल थे जिनके परिजनों को रिकॉर्ड में मृत बताया गया, और कुछ ऐसे नागरिक भी थे जिन्हें गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया है।
काला शॉल पहनकर जताया विरोध
चुनाव आयोग से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने काला शॉल पहनकर विरोध दर्ज कराया। बैठक के बाद बाहर निकलकर ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला।
ममता ने कहा कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में ऐसा रवैया पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि किसी पद की गरिमा स्थायी नहीं होती और हर पद पर बैठा व्यक्ति एक दिन जवाबदेह होता है। उनके मुताबिक, आयोग की ओर से उनके सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
“58 लाख नाम हटे, मौका तक नहीं मिला”
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर पश्चिम बंगाल में लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए, वह भी बिना उचित नोटिस या सुनवाई के। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रक्रिया निष्पक्ष है, तो असम जैसे राज्यों में SIR क्यों नहीं लागू किया गया? लोकतंत्र में चुनाव नागरिकों का अधिकार है, फिर लोगों को सफाई का मौका क्यों नहीं दिया गया? ममता का दावा है कि आयोग इस चयनात्मक कार्रवाई को लेकर कोई ठोस कारण नहीं बता सका।
बंग भवन दौरा और पुलिस पर सवाल
इससे पहले ममता बनर्जी रविवार रात दिल्ली पहुंची थीं, जहां उन्होंने SIR से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। सोमवार सुबह उन्होंने चाणक्यपुरी और हेली रोड स्थित बंग भवन का दौरा किया, जहां ये परिवार ठहरे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बंगाल से आए लोगों पर दिल्ली पुलिस अनावश्यक दबाव बना रही है। उन्होंने कहा कि ये लोग न्याय की मांग करने आए हैं, न कि किसी आंदोलन के लिए।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR को लेकर टीएमसी पहले से ही असंतोष जता रही है। पार्टी का आरोप है कि यह प्रक्रिया मनमानी और राजनीतिक रूप से प्रेरित है। ममता बनर्जी इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुकी हैं। 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले यह विवाद राज्य की राजनीति में तापमान और तेज कर रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या चुनाव आयोग इन आरोपों पर कोई ठोस कदम उठाएगा? या फिर SIR को लेकर टकराव और गहराएगा? राजनीतिक हलकों की नजरें अब आयोग के अगले रुख पर टिकी हैं।
