दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी स्कूलों में फीस नहीं बढ़ेगी! SLFRC गठन पर रोक, जानें पूरी डिटेल

punjabkesari.in Saturday, Feb 28, 2026 - 06:11 PM (IST)

नेशनल डेस्क: राष्ट्रीय राजधानी में निजी स्कूलों और अभिभावकों के लिए बड़ी कानूनी राहत की खबर सामने आई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार की उस अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें प्राइवेट स्कूलों को 10 दिनों के भीतर School Level Fee Regulation Committee (SLFRC) गठित करने और अगले तीन शैक्षणिक सत्रों की प्रस्तावित फीस का ब्योरा देने का निर्देश दिया गया था। यह आदेश 28 फरवरी 2026 को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने सुनाया।

 फिलहाल नहीं बनेगी SLFRC

अदालत ने कहा है कि जब तक याचिकाएं लंबित हैं, तब तक SLFRC गठन की प्रक्रिया पर रोक रहेगी। यानी निजी स्कूलों को अभी कमेटी बनाने की बाध्यता नहीं है। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में स्कूल वही फीस वसूल सकते हैं, जो उन्होंने 2025-26 सत्र में ली थी। हालांकि, न्यायालय ने यह भी जोड़ा कि किसी भी प्रकार की मनमानी या अत्यधिक फीस वृद्धि कानून के तहत जांच के दायरे में रहेगी।

क्या था पूरा मामला?

फरवरी 2026 में दिल्ली सरकार ने नई अधिसूचना जारी कर निजी अनएडेड स्कूलों को निर्देश दिया था कि वे 10 दिनों के भीतर SLFRC गठित करें। इसका उद्देश्य फीस निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना बताया गया था। लेकिन कई स्कूल संगठनों, जिनमें DPS सोसाइटी भी शामिल है, ने इस आदेश को अदालत में चुनौती दी। उनका तर्क था कि इतनी कम समय-सीमा में कमेटी बनाना व्यावहारिक नहीं है और यह प्रावधान दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट के अनुरूप नहीं है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अधिसूचना के क्लॉज 3(1) और 3(2) पर अंतरिम रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को तय की गई है। तब तक यथास्थिति (Status Quo) बनी रहेगी।

पैरेंट्स, स्कूल और सरकार के लिए क्या मायने?

  • नए सत्र में फीस बढ़ोतरी नहीं होगी।
  • पिछले वर्ष के अनुसार ही फीस संरचना लागू रहेगी।
  • फिलहाल SLFRC बनाने की बाध्यता खत्म।
  • लेकिन फीस से जुड़ा हर निर्णय कानूनी दायरे में रहेगा।
  • फीस नियंत्रण की पहल पर अस्थायी विराम।
  • अंतिम निर्णय अदालत के अगले आदेश पर निर्भर करेगा।

12 मार्च 2026 की सुनवाई इस पूरे मामले में अहम होगी। उसी के बाद यह तय होगा कि फीस नियमन से जुड़ी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी। फिलहाल, यह फैसला लाखों अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के लिए राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि नए शैक्षणिक सत्र से पहले फीस को लेकर बनी अनिश्चितता पर विराम लग गया है।


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Content Writer

SHUKDEV PRASAD

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