जाति जनगणना और 33% महिला आरक्षण: नितिन नबीन के लिए ''कांटों भरा ताज'' है बीजेपी की प्रधानी? जानें इनसाइड स्टोरी
punjabkesari.in Thursday, Jan 15, 2026 - 05:48 PM (IST)
नेशनल डेस्क: बीजेपी के संगठनात्मक चुनाव अब अपने अंतिम पड़ाव पर हैं। 20 जनवरी को नितिन नबीन का पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाना महज एक औपचारिकता माना जा रहा है। 45 साल के नबीन इस पद पर के लिए सबसे कम उम्र के नेता होंगे।
प्रस्तावक बनेंगे पार्टी के 'स्तंभ'
नितिन नबीन के नामांकन को पार्टी की एकजुटता और शीर्ष नेतृत्व के भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है। इस मौके के गवाह पीएम मोदी खुद बनेंगे। इस नामांकन पत्र के एक सेट पर पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा के हस्ताक्षर होंगे। दूसरे सेट पर 20 से अधिक राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के हस्ताक्षर होंगे, जबकि तीसरा सेट राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों द्वारा प्रस्तावित किया जाएगा।
19 और 20 जनवरी को दिल्ली पहुंचेंगे नेता
19 और 20 जनवरी को दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय में सभी बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।

2026 से 2029 तक का रोडमैप
नितिन नबीन का कार्यकाल 3 साल का होगा, लेकिन उनकी डगर आसान नहीं है। उन्हें 'मिशन 2029' (लोकसभा चुनाव) की नींव रखने के साथ-साथ कई तात्कालिक मोर्चों पर खुद को साबित करना होगा:
1. क्षेत्रीय विस्तार और विधानसभा चुनाव
2026 में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में चुनाव हैं।
- असम: सत्ता बचाना साख की लड़ाई है।
- बंगाल: ममता बनर्जी के मजबूत गढ़ में पैठ बनाना सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
- दक्षिण का द्वार: कर्नाटक के अलावा तमिलनाडु और केरल में पार्टी को 'कैडर' से 'वोटर' तक ले जाना नबीन की प्राथमिकता होगी।
2. 'नारी शक्ति' और सीमांकन (Delimitation)
2027 की जनगणना के बाद होने वाला परिसीमन उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक राजनीतिक असंतुलन पैदा कर सकता है। साथ ही 33% महिला आरक्षण लागू करना और यह सुनिश्चित करना कि टिकट केवल 'नेताओं के परिजनों' को न मिले, एक नैतिक और संगठनात्मक चुनौती होगी।
3. एक राष्ट्र, एक चुनाव
यदि यह कानून लागू होता है, तो बीजेपी को अपनी पूरी चुनाव मशीनरी को एक साथ हजारों सीटों पर लड़ने के लिए तैयार करना होगा। समीक्षा और सुधार का समय खत्म हो जाएगा, जिसके लिए माइक्रो-मैनेजमेंट की जरूरत होगी।
4. जाति जनगणना और सामाजिक संतुलन
2027 की जनगणना में जाति गणना के शामिल होने से नए समीकरण बनेंगे। नबीन को अपने पुराने सवर्ण वोट बैंक और बढ़ते ओबीसी/दलित आधार के बीच संतुलन बनाना होगा।
5. वंशवाद के आरोप को खत्म करना
पीएम मोदी के आह्वान पर एक लाख ऐसे युवाओं को राजनीति में लाना, जिनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है, नबीन के मुख्य एजेंडे में शामिल है। यह पार्टी में 'वंशवाद' के आरोपों को खत्म करने की एक बड़ी योजना है।
