Corona Vaccination: सौ करोड़ वैक्सीन के जश्न के बाद भी देश के हैं आगे ये बड़ी चुनौतियां

10/23/2021 11:05:08 AM

नेशनल डेस्क: भारत ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अहम पड़ाव हासिल करते हुए 100 करोड़ कोविड टीकाकरण का आंकड़ा पार कर लिया है। 100 करोड़ वैक्सीन डोज लोगों को लगाने में भारत को 285 दिन लगे। इस टीकाकरण की तेजी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि भारत को टीबी की 100 करोड़ डोज तक पहुंचने में 32 साल लगे थे जबकि पोलियो की पहली 100 करोड़ डोज तक पहुंचने में 20 साल लगे। लेकिन इस टीकाकरण के क्या मायने हैं और दूसरे देशों के मुकाबले यह कहां ठहरता है। इस मुकाम पर पहुंचने के बाद भी भारत के आगे बच्चों के वैक्सीनेशन एक बड़ी चुनौती है। भारत में 18 साल से कम उम्र के 44 करोड़ बच्चे हैं, ऐसे में वैक्सीन की 84 से 88 करोड़ डोज की जरूरत पड़ेगी।

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वैक्सीनेशन में अमेरिका से आगे है भारत
वैक्सीनेशन के मामले में भारत से आगे सिर्फ चीन है जहां 200 करोड़ से ज्यादा खुराक दी गयी हैं। वहीं भारत 100 करोड़ डोज के साथ दूसरे नंबर पर आता है, जो अमेरिका से 58 करोड़ ज्यादा है। जहां अमेरिका, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों के वैक्सीनेशन का ग्राफ सपाट बना हुआ है, वहीं भारत में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। फुल वैक्सीनेशन की बात की जाए तो भारत अपनी 28 करोड़ से ज्यादा आबादी का पूरी तरह से वैक्सीनेशन कर चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। ये संख्या अमेरिका से कम से कम 10 करोड़ ज्यादा है और जापान, जर्मनी, रूस, फ्रांस और यूके की पूरी तरह से प्रतिरक्षित आबादी के कुल जोड़ के बराबर है।

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100 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले सिर्फ दो देश
अगर केवल वैक्सीन डोज की संख्या की बात करें तो केवल भारत और चीन ही 100 करोड़ वाले क्लब में शामिल हैं। इस क्लब में किसी दूसरे देश का शामिल होना संभव ही नहीं है क्योंकि अन्य किसी देश की इतनी आबादी ही नहीं है। ऑवर वर्ल्ड इन डाटा के वैक्सीन ट्रैकर आंकड़े बताते हैं कि डोज के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है। इसके बाद अमेरिका, ब्राजील, जापान, इंडोनेशिया, तुर्की, मैक्सिको, रूस और ब्रिटेन का स्थान है।

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जर्मनी और फ्रांस से कई गुना ज्यादा
सरकार की मानें तो भारत ने जापान की तुलना में पांच गुना अधिक, जर्मनी से नौ गुना अधिक और फ्रांस से तो दस गुना ज्यादा कोरोना वायरस वैक्सीन की डोज लोगों को लगाई है।  Covidvax.live के अनुसार भारत में टीकाकरण की गति भी सबसे तेज है। अमेरिका से 22 लाख और जापान से 28 लाख डोज प्रतिदिन लगाई गई हैं जबकि भारत में प्रतिदिन 35 लाख से ज्यादा डोज दी गई है।

आबादी के आधार पर भारत पीछे
जब आबादी के प्रतिशत के आधार पर देखते हैं तो ये आंकड़े चौंकाने वाली हद तक बदल जाते हैं और यहां भारत काफी पीछे नजर आता है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी का वैक्सीन ट्रैकर बताता है कि संयुक्त अरब अमीरात 87.26 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन लगाने के साथ सूची में सबसे आगे है। इसके बाद पुर्तगाल, माल्टा, सिंगापुर और स्पेन जैसे अन्य छोटे देश हैं, जिन्होंने अपनी 80 प्रतिशत से अधिक आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया है। चीन ने भी भारत की तरह 100 करोड़ से अधिक लोगों को टीका लगाया है लेकिन 74.97 प्रतिशत के साथ सूची में 13वें स्थान पर है। भारत में अभी 20.55 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण हुआ है और यह अपने पड़ोसी देशों नेपाल, श्रीलंका और भूटान से नीचे है।

 भारत में 10 हजार लोगों ने नहीं ली दूसरी डोज
खुद कोविड टास्क फोर्स के चीफ वीके पॉल बताते हैं कि भारत में 10 हजार लोग ऐसे हैं जिन्होंने वैक्सीन की पहली डोज तो लगवा ली, लेकिन दूसरी डोज लगवाने ही नहीं आए। उन्होंने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि कोरोना वैक्सीन की एक डोज से सिर्फ आंशिक रूप से इम्युनिटी मिलती है। जबकि दोनों डोज लेने से अच्छी इम्युनिटी मिलती है। पहली-दूसरी डोज के बीच ये भारी अंतर शुरुआत से ही देखने को मिला है। एक्सपर्ट मानते हैं कि मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी लोगों के मन में ऐसी धारणाएं बन चुकी हैं जिस वजह से ये अंतर काफी ज्यादा देखने को मिल रहा है।

आगे की चुनौतियां और सरकार की रणनीति?
सिरिंज बहस के बीच एक सवाल सरकार के सामने बच्चों के टीकाकरण को लेकर भी है। कई बड़े देशों में 2 से 18 साल के बच्चों को कोरोना का टीका लग चुका है, लेकिन इस मामले में भारत अभी पीछे है। कहा जा रहा है कि जब तक पर्याप्त रिसर्च नहीं कर ली जाती, बच्चों को वैक्सीन नहीं दे सकते। कोविड टास्क फोर्स के चीफ वी.के. पॉल बताते हैं कि जायडस कैडिला की वैक्सीन को टीकाकरण भी शामिल किया जा रहा है, ट्रेनिंग भी शुरू हो चुकी है। जल्द ही कोई फैसला लिया जाएगा। टीकाकरण अभियान की शुरुआत में वैक्सीन संकट जबरदस्त था, कई राज्यों के पास वैक्सीन स्टॉक खत्म हो रहा था। अब उस स्थिति से तो पार पा लिया गया है, लेकिन देश में सिरिंज की कमी पर बहस छिड़ गई। हाल ही में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सिरिंज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन कई एक्सपर्ट मानते हैं कि केंद्र ने ये फैसला काफी देर से लिया है।


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Content Writer

Anil dev

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