मानसून की जोरदार दस्तक, झमाझम बारिश से खेती को राहत, 12 से ज्यादा राज्यों में हुई भारी बारिश
punjabkesari.in Tuesday, Aug 11, 2026 - 11:13 AM (IST)
नई दिल्ली: देश में मानसून की बारिश ने अगस्त की शुरुआत में अचानक रफ्तार पकड़ ली है। पिछले कुछ महीनों से मॉनसून को लेकर काफी चर्चा हो रही है। भारत में बारिश का पहला दौर शुरू होने से पहले ही, मौसम की स्थितियों के कारण बारिश कम होने की काफी चिंता थी। बारिश पर नज़र रखने वालों के लिए अगस्त 2026 एक सुखद आश्चर्य लेकर आया, क्योंकि इसके पहले ही हफ़्ते में ज़बरदस्त बारिश हुई। असल में, राष्ट्रीय राजधानी में अगस्त महीने की औसत बारिश का रिकॉर्ड महीने के शुरुआती आठ दिनों में ही टूट गया। इतनी बारिश से शहर में जल-जमाव, ट्रैफ़िक जाम और सड़कें बंद होने जैसी समस्याएँ पैदा हो गईं।
12 से ज़्यादा राज्यों में ज़ोरदार बारिश
IMD के अनुसार, यह बारिश ऐतिहासिक थी, 2011 के बाद से अगस्त का पहला हफ़्ता सबसे ज़्यादा बारिश वाला हफ़्ता रहा। राष्ट्रीय राजधानी और आस-पास के इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किए गए और 12 से ज़्यादा राज्यों में ज़ोरदार बारिश हुई, जिससे बारिश की कमी की चिंता कम हुई और अच्छी बारिश की उम्मीदें फिर से जाग गईं। फिलहाल, बारिश धीमी हो गई है और राष्ट्रीय राजधानी के लिए कोई बड़ी चेतावनी जारी नहीं की गई है।
कुल मिलाकर, जैसे-जैसे पूरे भारत में मॉनसून की बारिश ज़ोर पकड़ रही है, शुरुआती धीमी गति के बाद खेती-बाड़ी की गतिविधियों में साफ़ तौर पर सुधार दिख रहा है। हालाँकि, बारिश का असमान वितरण और उभरते वैश्विक जलवायु पैटर्न मौजूदा खरीफ़ फ़सल सीज़न के लिए मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं।
खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी
मानसून के सक्रिय होने का सीधा फायदा खेती को मिला है। बारिश बढ़ने के साथ किसानों ने खरीफ फसलों की बुवाई तेज कर दी है। शुरुआती धीमी प्रगति के बाद अब पिछले साल के मुकाबले बुवाई का अंतर लगातार कम हो रहा है। Agriculture Ministry के आंकड़ों के अनुसार, 7 अगस्त तक देश में Kharif Crops की कुल बुवाई पिछले साल की तुलना में करीब 17.96 लाख हेक्टेयर पीछे थी। इससे पहले 24 जुलाई तक यह अंतर करीब 38.82 लाख हेक्टेयर था। यानी केवल दो सप्ताह में बुवाई का अंतर काफी घटा है।
Pulse Crops की स्थिति में भी सुधार देखने को मिला है। 24 जुलाई को दालों की बुवाई पिछले साल से करीब 6.90 लाख हेक्टेयर कम थी, जो 7 अगस्त तक घटकर लगभग 1.95 लाख हेक्टेयर रह गई। यह सुधार बताता है कि बारिश में तेजी आने से किसानों को खेत तैयार करने और खरीफ फसलों की बुवाई आगे बढ़ाने में मदद मिली है।
Rice और Oilseeds की बुवाई अभी पीछे
हालांकि सभी फसलों की स्थिति एक जैसी नहीं है। Rice और Oilseeds की बुवाई अब भी चिंता का कारण बनी हुई है। 7 अगस्त तक Rice की बुवाई पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 15.90 लाख हेक्टेयर कम रही। चावल की खेती के लिए शुरुआती मानसून की पर्याप्त बारिश बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए जिन इलाकों में बारिश सामान्य से कम रही है, वहां Rice sowing पर असर पड़ा है। Oilseeds की स्थिति भी कमजोर हुई है। 24 जुलाई को इन फसलों की बुवाई में करीब 3.45 लाख हेक्टेयर की कमी थी। 7 अगस्त तक यह अंतर बढ़कर 5.19 लाख हेक्टेयर हो गया। इसलिए मानसून की मौजूदा तेजी के बावजूद Rice और Oilseeds के लिए आने वाले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे।
East और Northeast India सबसे बड़ी चिंता
देश में बारिश की स्थिति हर क्षेत्र में समान नहीं है। Central और Northwestern India में बारिश की कमी काफी हद तक दूर हुई है, लेकिन East और Northeast India के कई हिस्सों में अब भी सामान्य से कम बारिश हुई है। East और Northeast India का कुल rainfall deficit करीब 25.5 फीसदी है, जो देश के प्रमुख इलाकों में सबसे अधिक है। यह स्थिति इसलिए अहम है क्योंकि इस इलाके में बड़ी मात्रा में खेती बारिश पर निर्भर रहती है। कम बारिश का सीधा असर खेतों में पानी की उपलब्धता और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। दिलचस्प बात यह है कि Northeast के कुछ हिस्सों में इस साल गंभीर बाढ़ भी आई है। इससे यह साफ होता है कि भारी बारिश और बारिश की कमी एक ही समय में अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिल सकती है। यानी समस्या केवल कुल बारिश की मात्रा की नहीं, बल्कि उसके समय और वितरण की भी है।
Low-Pressure Systems से और बारिश की उम्मीद
मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के मुताबिक Bay of Bengal के ऊपर बनने वाले नए Low-Pressure Systems आने वाले दिनों में Central, Western और Eastern India के कई हिस्सों में बारिश बढ़ा सकते हैं।
El Nino ने बढ़ाई चिंता
हालांकि अभी मानसून में सुधार हुआ है, लेकिन लंबे समय के मौसम पूर्वानुमान किसानों और नीति-निर्माताओं के लिए पूरी तरह राहत देने वाले नहीं हैं।
इसका एक प्रमुख कारण संभावित El Nino है। El Nino के मजबूत होने पर भारत सहित दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में मानसूनी गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। WMO ने सामान्य से अधिक तापमान की भी आशंका जताई है। यदि कम बारिश के साथ तापमान बढ़ता है, तो फसलों पर Heat Stress बढ़ सकता है और उत्पादन प्रभावित होने का जोखिम रहेगा।
