उत्तर प्रदेश की राज्यपाल का भाषण परम्परा से हटकर वास्तविक होता तो यह बेहतर होता : मायावती

punjabkesari.in Monday, Feb 09, 2026 - 04:46 PM (IST)

नेशनल डेस्क : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल का भाषण परम्परा से हटकर राज्य के विकास एवं सर्वसमाज के उत्थान समेत व्यापक जनहित में वास्तविक एवं थोड़ा उत्साही होता तो यह बेहतर होता।

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मायावती ने 'एक्स' पर लिखा,''उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज राज्यपाल द्वारा विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किये जाने की संसदीय परम्परा से शुरू हुआ, किन्तु उनका यह भाषण परम्परा से हटकर प्रदेश के विकास एवं सर्वसमाज के उत्थान समेत व्यापक जनहित में वास्तविक एवं थोड़ा उत्साही होता तो यह बेहतर होता।'' उन्होंने कहा,''वास्तव में पूरे उत्तर प्रदेश में सर्वसमाज के करोड़ों लोग सरकार की ग़लत नीतियों एवं कार्यकलापों से त्रस्त हैं। उन्हें गरीबी एवं बेरोजगारी आदि के कारण अनेकों प्रकार की कठिन पारिवारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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किन्तु इन सबसे ज़्यादा उन्हें अपने जान-माल एवं मजहब की ज़्यादा चिन्ता सता रही है, जिसके प्रति राज्यपाल को सरकार का ध्यान आकर्षित कराना चाहिए था ताकि प्रदेश की जनता के साथ-साथ विपक्ष को भी थोड़ा आश्वासन मिलता। ऐसा न होने कारण ही राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष की नारेबाजी होती रही तथा हंगामा भी होता रहा।'' बसपा ने कहा कि राज्यपाल के सम्बोधन में भाजपा सरकार के जनहित एवं जनकल्याण सम्बंधी बड़े-बड़े दावों, आश्वासनों, घोषणाओं एवं वादों आदि को पूरा करने का विवरण नहीं होना लोगों के लिए चिन्ताजनक है, जिसका आगामी बजट भाषण में समायोजन करना उचित होगा।

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बजट सत्र के पहले दिन उत्तर प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने योगी आदित्यनाथ सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने विधानसभा के अंदर और बाहर विभिन्न मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किया। 


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Mehak

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