9 साल में सीखी Python, 12 साल की उम्र में माना जंपाला ने खड़ी कर दी AI कंपनी, 3 देशों में हैं क्लाइंट
punjabkesari.in Monday, Jul 13, 2026 - 07:10 AM (IST)
Mana Jampala: सिर्फ 12 साल की उम्र में जहां ज्यादातर बच्चे स्कूल की पढ़ाई और खेलकूद में बिजी रहते हैं, वहीं माना जंपाला (Mana Jampala) ने अपनी खुद की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप खड़ी कर दी है। उनकी कंपनी के AI समाधान अब भारत, कनाडा और कंबोडिया जैसे तीन देशों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
ग्रेड 7 में पढ़ने वाली माना ने टेक्नाॅलजी में अपनी रुचि बहुत कम उम्र से ही विकसित कर ली थी। उन्होंने महज 9 साल की उम्र में Python प्रोग्रामिंग सीखनी शुरू कर दी। लगातार सीखने और प्रयोग करने के बाद उन्होंने 11 साल की उम्र तक कई AI आधारित प्रोडक्ट तैयार कर लिए। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली माना को दुनिया की सबसे कम उम्र की AI उद्यमियों में गिना जा रहा है।
9 साल की उम्र में शुरू हुआ Coding का सफर
ब्रिटिश कोलंबिया के केलोना शहर में रहने वाली माना ने तकनीक में रुचि बचपन से ही दिखानी शुरू कर दी थी। उन्होंने सबसे पहले Scratch के जरिए कोडिंग सीखी और महज 9 साल की उम्र में Python Programming सीखना शुरू कर दिया। लगातार अभ्यास और नए प्रयोगों की बदौलत उन्होंने 11 साल की उम्र तक AI आधारित प्रोडक्ट तैयार करने शुरू कर दिए।
पिता के ऑफिस की एक समस्या से मिला Startup का आइडिया
माना को Voxa बनाने का विचार अपने पिता के कार्यस्थल से मिला। उन्होंने देखा कि कर्मचारी कई बार ग्राहकों की कॉल का जवाब नहीं दे पाते, क्योंकि वे दूसरे कामों में व्यस्त होते हैं। इससे कारोबार के कई संभावित ग्राहक छूट जाते थे। यहीं से उन्होंने ऐसा AI Voice Receptionist तैयार करने का फैसला किया, जो 24 घंटे ग्राहकों की कॉल रिसीव कर सके और बिजनेस को कोई भी महत्वपूर्ण कॉल मिस न करने दे।
क्या करता है Voxa?
Voxa एक AI आधारित वॉइस असिस्टेंट है, जिसे खासतौर पर रेस्तरां, फार्मेसी और अन्य सर्विस बिजनेस के लिए तैयार किया गया है। यह सिस्टम कई जरूरी काम अपने आप कर सकता है, जैसे---
ग्राहकों की कॉल रिसीव करना
अपॉइंटमेंट बुक करना
रेस्टोरेंट ऑर्डर लेना
फॉलो-अप संभालना
हर बातचीत की ऑटोमैटिक रिपोर्ट तैयार करना
माना के अनुसार, उनका प्लेटफॉर्म पहले से ही सैकड़ों ग्राहक कॉल संभाल रहा है और कनाडा में लगातार विस्तार कर रहा है।
AI का इस्तेमाल किया, लेकिन खुद लिखा कोड
माना बताती हैं कि उन्होंने ChatGPT और Claude जैसे AI टूल्स की मदद जरूर ली, लेकिन पूरा प्रोजेक्ट AI के भरोसे नहीं छोड़ा। उन्होंने छोटे-छोटे हिस्सों में कोड लिखा, हर फीचर को टेस्ट किया, खुद बग ठीक किए और धीरे-धीरे पूरा सिस्टम तैयार किया। उनका मानना है कि इसी प्रक्रिया से उन्हें सॉफ्टवेयर को गहराई से समझने का मौका मिला।
मिल चुके हैं कई सम्मान
कम उम्र में माना के काम को कई मंचों पर सराहा गया है। भारत यात्रा के दौरान उन्होंने एक कॉलेज-स्तरीय विज्ञान प्रतियोगिता में विशेष पुरस्कार जीता। इसके अलावा उन्हें 1517 Fund के Medici Project से ग्रांट भी मिली, जो युवा उद्यमियों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करता है।
अब AI Agents पर कर रही हैं काम
Voxa के बाद माना अब Voxa Agents नाम का नया प्लेटफॉर्म तैयार कर रही हैं। इसका उद्देश्य ऐसे AI एजेंट बनाना है, जिन्हें सामान्य अंग्रेजी में निर्देश देकर अलग-अलग काम करवाए जा सकें। ये एजेंट प्रतियोगियों पर नजर रखने, मीटिंग की तैयारी करने, ऑनलाइन जानकारी जुटाने और अन्य कई डिजिटल कार्य अपने आप पूरा कर सकते हैं।
