लोकसभा में राहुल का वार: सरकार अमेरिका के आगे झुकी, देश के हित गिरवी – सत्ता पक्ष बोला, बेबुनियाद आरोप
punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 08:41 PM (IST)
नेशनल डेस्क: लोकसभा में बजट पर चल रही बहस उस समय गरमा गई जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में फैसले ले रही है, जिससे राष्ट्रीय हित प्रभावित हो रहे हैं।
राहुल गांधी ने विशेष रूप से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि इससे देश की आर्थिक और रणनीतिक मजबूती पर असर पड़ सकता है। उनके बयान के बाद सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर उठे सवाल
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने दावा किया कि व्यापार समझौते के तहत ऐसे निर्णय लिए गए हैं, जिनसे ऊर्जा सुरक्षा, कृषि क्षेत्र, आईटी इंडस्ट्री और डेटा संरक्षण जैसे अहम क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में देश की संप्रभुता और आर्थिक स्वतंत्रता सर्वोपरि होनी चाहिए। राहुल ने सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए और इसे राष्ट्रीय हितों के संदर्भ में परखा जाना जरूरी बताया।
सत्ता पक्ष का जवाब: ‘आरोप निराधार’
राहुल गांधी के आरोपों पर सत्ता पक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद में की जाने वाली आलोचना तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने विपक्षी नेता के कुछ शब्दों को अनुचित बताते हुए उन्हें रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए जा रहे फैसलों का बचाव किया और कहा कि सरकार राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
वित्त मंत्री भी निशाने पर, सदन में हंगामा
बहस के दौरान राहुल गांधी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विदेशी कंपनियों को दी गई कथित कर रियायतों को लेकर सरकार से जवाब मांगा। इस पर सत्ता पक्ष के सदस्य विरोध में खड़े हो गए और सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। स्थिति इतनी गरम हो गई कि बजट से जुड़े मूल मुद्दे पीछे छूट गए और चर्चा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई।
बढ़ता राजनीतिक तनाव
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि संसद में बजट जैसे अहम विषय भी अब तीखे राजनीतिक मतभेदों से अछूते नहीं हैं। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, जिस पर संसद और बाहर दोनों जगह बहस तेज होने की संभावना है।
