ईरान ने ताजमहल दौरे पर रुबियो को किया शर्मिंदा, कहा-“इतिहास पढ़ लेते तो वहां कभी न जाते”, सोशल मीडिया पर मिले करारे जवाब
punjabkesari.in Tuesday, May 26, 2026 - 01:07 PM (IST)
International Desk: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इन दिनों भारत दौरे पर हैं। अपनी व्यस्त कूटनीतिक यात्रा के दौरान उन्होंने ताजमहल का दौरा किया और वहां तस्वीरें भी खिंचवाईं। लेकिन रुबियो का यह दौरा ईरान को पसंद नहीं आया। ईरानी मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी तस्वीरों को लेकर तीखी टिप्पणियां शुरू कर दीं।
ईरान ने क्या कहा?
ईरानी दूतावास और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि अगर मार्को रुबियो को इतिहास और वास्तुकला की सही जानकारी होती, तो शायद वे ताजमहल पर इस तरह तस्वीरें खिंचवाने नहीं जाते। ईरानी पक्ष का कहना है कि ताजमहल एक मुगल सम्राट द्वारा अपनी ईरानी मूल की पत्नी के लिए बनवाया गया प्रेम स्मारक है। इसकी वास्तुकला में ईरानी कला और कारीगरी की बड़ी भूमिका रही है। आज वही अमेरिकी सरकार ईरानी नागरिकों को निशाना बना रही है। ईरानी पोस्ट में तंज कसते हुए कहा गया कि अमेरिका एक तरफ दुनिया की सभ्यताओं की बात करता है और दूसरी तरफ ईरान की ऐतिहासिक पहचान को मिटाने की धमकियां देता है।
If Rubio knew the history or architecture, he wouldn't have posed for a picture here. This monument was built out for the love of emperor's Iranian wife, crafted by the genius of Iranian architects — meanwhile his government today threatens to wipe out Iranian civilization,… pic.twitter.com/zi4CNU3u7U
— Iran In Hyderabad (@IraninHyderabad) May 25, 2026
ताजमहल और ईरान का संबंध
ताज महल को मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था। मुमताज महल का परिवार फारसी मूल से जुड़ा माना जाता है। उनके पिता अब्दुल हसन आसफ खान ईरानी पृष्ठभूमि से थे। इतिहासकार बताते हैं कि ताजमहल की वास्तुकला में फारसी (ईरानी) शैली, इस्लामी कला भारतीय कारीगरी का अनोखा मिश्रण दिखाई देता है। इसके अलावा मुख्य वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी (Ustad Ahmad Lahori) समेत कई कारीगर फारसी और मध्य एशियाई परंपराओं से प्रभावित थे।
دمتون گرم برای این توییت زیبا
— یکی بود یکی نبود 📖 (@0mhp037) May 25, 2026
کافی بود بالای سرش نگاه کنه این جمله فارسی رو ببینه pic.twitter.com/L04hfJfLtD
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विवाद
रुबियो की ताजमहल वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं।कई ईरानी यूजर्स ने लिखा कि “ताजमहल सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि ईरानी सांस्कृतिक प्रभाव की भी निशानी है।”कुछ यूजर्स ने अमेरिका की मध्य पूर्व नीति और ईरान पर दबाव को लेकर भी आलोचना की। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य गतिविधियां, परमाणु कार्यक्रम विवाद और अमेरिकी प्रतिबंध दोनों देशों के रिश्तों को लगातार प्रभावित कर रहे हैं। इसी वजह से ईरानी सोशल मीडिया यूजर्स ने रुबियो के ताजमहल दौरे को राजनीतिक नजरिए से भी देखा।
You are confused. There is a difference between Iranians and the IRGC and company. Not all Iranians are Akhunds. Rubio doesn't hate Iranians and their great history and civilization but hates the regime that has held the Iranian people hostage for more than 40 years. Your own…
— Hamid Khan (@hamidmohmand) May 25, 2026
ईरानी अधिकारियों की प्रतिक्रिया
इस्माइल बघेई समेत कई ईरानी अधिकारियों ने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका पर निशाना साधा। उनका कहना था कि “ईरान हजारों साल पुरानी सभ्यता वाला देश है और उसकी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान किया जाना चाहिए।” Taj Mahal दुनिया के सात अजूबों में शामिल है और भारत की सबसे पहचान वाली ऐतिहासिक धरोहरों में से एक माना जाता है।
Yes, this monument was built with gold looted from Indian temples.https://t.co/ma8Am9dzcW
— Mridul Goswami (@mridulgoswami) May 25, 2026
