ईरान का खुला संदेश: खाड़ी देशों पर हमले आत्मरक्षा के लिए, US बेस खत्म करना जरूरी
punjabkesari.in Saturday, Mar 14, 2026 - 07:47 PM (IST)
International Desk: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने खाड़ी देशों में हुए हमलों को लेकर अपना पक्ष खुलकर रखा है। ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत स्थित प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का मकसद पड़ोसी देशों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि उन अमेरिकी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाना है जिनका इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया जा रहा है। नई दिल्ली में दिए गए एक इंटरव्यू में इलाही ने कहा कि ईरान इस क्षेत्र में हजारों साल से मौजूद है, जबकि अमेरिका हजारों किलोमीटर दूर है और सीधे अपने देश से हमला नहीं कर सकता। इसलिए अमेरिका ने ईरान के आसपास कई देशों में सैन्य ठिकाने बना रखे हैं।
उनका दावा है कि अमेरिका ने ईरान के आसपास लगभग 33 से 45 सैन्य अड्डे स्थापित किए हैं। इलाही के मुताबिक युद्ध शुरू होने से पहले ईरान ने पड़ोसी देशों से अनुरोध किया था कि वे अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न करने दें। उन्होंने कहा कि इन देशों ने ऐसा न करने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में उन्हीं अड्डों से हमले हुए, जिसके बाद ईरान को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। इलाही ने कहा कि इसलिए ईरान के हमले उन सैन्य अड्डों को नुकसान पहुंचाने के लिए किए जा रहे हैं ताकि वहां से ईरान पर हमला न हो सके। उनके शब्दों में, “हमें इन अड्डों को नुकसान पहुंचाना होगा ताकि वे हम पर हमला न कर सकें।”संघर्ष में नागरिकों की मौत पर पूछे गए सवाल पर ईरानी प्रतिनिधि ने कहा कि निर्दोष लोगों की मौत दुखद है, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार वे देश हैं जिन्होंने युद्ध शुरू किया।
उन्होंने दुनिया के नेताओं से अपील की कि वे युद्ध की आलोचना करने के बजाय यह सवाल पूछें कि इस संघर्ष की शुरुआत किसने की। इलाही ने यह भी दावा किया कि मिनाब के प्राइमरी गर्ल्स स्कूल पर हमला बहरीन की दिशा से दागी गई मिसाइल से हुआ था, जिसमें 180 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि हमला संभवतः अमेरिकी सेना की गलत जानकारी के आधार पर हुआ हो सकता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी पूरी तरह नहीं हुई है।
पश्चिम एशिया में यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद हालात तब और बिगड़ गए जब संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई।इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिका से जुड़े ठिकानों तथा खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सैन्य अड्डों को निशाना बनाया।
