AMOGH JWALA में पहली बार मैकेनाइज्ड फोर्सेस के साथ अटैक हेलिकॉप्टर्स का इंटीग्रेशन
punjabkesari.in Thursday, Mar 19, 2026 - 01:43 PM (IST)
नेशनल डेस्क: भारतीय सेना की भविष्य की युद्ध तैयारी और टेक्नोलॉजी आधारित सैन्य क्षमता का बड़ा प्रदर्शन करते हुए सदर्न कमांड ने 6 मार्च से 18 मार्च 2026 तक बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में एक्सरसाइज AMOGH JWALA का सफल आयोजन किया। इस युद्धाभ्यास में आधुनिक युद्धक्षेत्र के अनुरूप टेक्नोलॉजी-ड्रिवन मैकेनाइज्ड वॉरफेयर क्षमताओं को परखा गया, लेकिन इसकी सबसे अहम और रणनीतिक उपलब्धि रही कि पहली बार मैकेनाइज्ड फोर्सेस के साथ अटैक हेलिकॉप्टर्स के इंटीग्रेटेड ऑपरेशन को वैलिडेट किया गया।
इसे भारतीय सेना की भविष्य की युद्ध अवधारणा और एयर-लैंड बैटल इंटीग्रेशन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस अभ्यास ने साफ कर दिया कि आने वाले समय में जंग सिर्फ टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों के भरोसे नहीं लड़ी जाएगी, बल्कि जमीन पर आगे बढ़ रही मैकेनाइज्ड फॉर्मेशंस को हवा से अटैक हेलिकॉप्टर्स, ड्रोन और नेटवर्क-आधारित युद्धक प्रणालियों का भी रियल-टाइम सपोर्ट मिलेगा।
इस युद्धाभ्यास का समापन लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, PVSM, UYSM, AVSM, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, सदर्न कमांड की मौजूदगी में हुआ। उन्होंने इसमें शामिल जवानों की प्रोफेशनलिज़्म, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और बैटल रेडीनेस की सराहना की। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने कहा कि टेक्नोलॉजी एब्जॉर्प्शन, जॉइंटनेस और थल, वायु, साइबर, स्पेस, इंटेलिजेंस, सर्विलांस एंड रिकॉनिसेंस (ISR) तथा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) क्षमताओं का निर्बाध एकीकरण एक ऐसी चुस्त, अनुकूलनीय और युद्ध के लिए तैयार सेना के निर्माण के लिए बेहद जरूरी है, जो बदलते युद्धक्षेत्र में हर मोर्चे पर बढ़त बनाए रख सके।
एक्सरसाइज AMOGH JWALA का उद्देश्य मल्टी-डोमेन ऑपरेशनल एनवायरनमेंट में नई ऑपरेशनल अवधारणाओं, फोर्स स्ट्रक्चर्स, प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल्स को परखना था। इस दौरान मैकेनाइज्ड फोर्सेस के साथ अटैक हेलिकॉप्टर्स, फाइटर एयरक्राफ्ट, अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (UAS), काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स और नेटवर्क-इनेबल्ड बैटलफील्ड प्लेटफॉर्म्स का एकीकृत इस्तेमाल किया गया। पूरा अभ्यास एक मजबूत कमांड एंड कंट्रोल आर्किटेक्चर के तहत संचालित हुआ।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, मैकेनाइज्ड फॉर्मेशंस और अटैक हेलिकॉप्टर्स का पहली बार इस तरह साथ काम करना भारतीय सेना की युद्धक क्षमता में बड़ा बदलाव दर्शाता है। यह एयर-लैंड बैटल इंटीग्रेशन की दिशा में एक अहम कदम है, जहां जमीन पर आगे बढ़ रही बख्तरबंद टुकड़ियों को हवा से हमला करने वाले हेलिकॉप्टर्स का रियल-टाइम सपोर्ट मिलेगा। इससे युद्ध में स्पीड, प्रिसिशन और मारक क्षमता कई गुना बढ़ सकती है।
अभ्यास के दौरान हाई-टेम्पो मैकेनाइज्ड ऑपरेशंस, सिंक्रोनाइज़्ड फायर एंड मैन्युवर, रीयल-टाइम ड्रोन-इनेबल्ड सर्विलांस, टारगेट एक्विजिशन और प्रिसिशन एंगेजमेंट का प्रदर्शन किया गया। सेना ने इस दौरान एडवांस्ड सर्विलांस सिस्टम्स, सिक्योर कम्युनिकेशन नेटवर्क्स और प्रिसिशन फायरपावर का इस्तेमाल किया, जिससे बैटलफील्ड ट्रांसपेरेंसी बढ़ी और कमांडरों को तेज़, सटीक और रीयल-टाइम फैसले लेने में मदद मिली। यह साफ संकेत है कि भारतीय सेना भविष्य के युद्धक्षेत्र में सिर्फ पारंपरिक ताकत पर नहीं, बल्कि नेटवर्क-आधारित और टेक्नोलॉजी-संचालित क्षमताओं पर भी बराबर जोर दे रही है।
इस अभ्यास में इंटीग्रेटेड एयर-लैंड मैन्युवर्स, UAS के लिए बैटलफील्ड एयरस्पेस मैनेजमेंट और काउंटर-UAS ऑपरेशंस को भी वैलिडेट किया गया। इसके साथ ही उभरती तकनीकों के मुताबिक फोर्स स्ट्रक्चर्स में बदलाव, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, एयर डिफेंस, नाइट-फाइटिंग क्षमताओं और ISR एसेट्स के बीच बेहतर तालमेल को भी परखा गया। आधुनिक युद्ध की जरूरतों के हिसाब से नए ऑपरेशनल कॉन्सेप्ट्स, प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल्स की भी इस दौरान जांच की गई।
AMOGH JWALA को भारतीय सेना के लिए सिर्फ एक नियमित युद्धाभ्यास नहीं, बल्कि भविष्य की जंग की एक झलक माना जा रहा है। यह अभ्यास दिखाता है कि आने वाले समय में लड़ाई सिर्फ टैंक बनाम टैंक नहीं होगी, बल्कि ड्रोन, अटैक हेलिकॉप्टर्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, रीयल-टाइम डेटा और नेटवर्क-आधारित कमांड सिस्टम यह तय करेंगे कि युद्धक्षेत्र में किसकी बढ़त होगी। मैकेनाइज्ड फोर्सेस के साथ पहली बार अटैक हेलिकॉप्टर्स के सफल इंटीग्रेशन ने इस अभ्यास को भारतीय सेना की मल्टी-डोमेन वॉरफाइटिंग क्षमता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बना दिया है।
