सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: एसिड अटैक सर्वाइवर्स को जॉब या मासिक भत्ता दो, नहीं तो कारण बताओ!

punjabkesari.in Monday, Mar 09, 2026 - 08:33 PM (IST)

नेशनल डेस्क: Supreme Court of India ने एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को ठोस नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि एसिड अटैक सर्वाइवर्स को सरकारी नौकरी देने के लिए योजना तैयार की जानी चाहिए। यदि किसी कारण से नौकरी उपलब्ध कराना संभव न हो, तो उनके लिए मासिक गुजारा भत्ता (Subsistence Allowance) की व्यवस्था करनी होगी। यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

कोर्ट ने राज्यों से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से पूछा है कि अब तक एसिड अटैक पीड़ितों के लिए ऐसी योजनाएं क्यों नहीं बनाई गईं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकारें नौकरी देने में किसी तरह की प्रशासनिक या अन्य दिक्कतों का हवाला देती हैं, तो उन्हें पीड़ितों के लिए वैकल्पिक आर्थिक सहायता का प्रावधान करना होगा। पीठ ने राज्यों से यह भी बताने को कहा कि पीड़ितों के पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा के लिए उन्होंने अब तक कौन-कौन से कदम उठाए हैं।

याचिका में सामने आईं कई व्यावहारिक समस्याएं

यह मामला एसिड अटैक सर्वाइवर Shaheen Malik की याचिका के जरिए अदालत के सामने आया। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Siddharth Luthra ने बिना शुल्क के पैरवी की। याचिका में बताया गया कि एसिड अटैक के शिकार लोगों को रोजमर्रा के कई जरूरी कामों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इनमें बैंक खाता खोलना, आधार कार्ड बनवाना, मोबाइल सिम लेना या संपत्ति से जुड़े दस्तावेज तैयार करना शामिल है।

KYC प्रक्रिया भी बनती है बड़ी बाधा

याचिका में यह भी कहा गया कि कई पीड़ितों को डिजिटल KYC प्रक्रिया में समस्या आती है। आमतौर पर KYC के दौरान आंखों की स्कैनिंग, पलक झपकाने की पहचान और फिंगरप्रिंट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

लेकिन एसिड अटैक के कारण चेहरे या आंखों को नुकसान पहुंचने से कई पीड़ितों के लिए यह प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं होता। याचिका में ऐसे मामलों के लिए वैकल्पिक KYC व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई है।

पुनर्वास के मुद्दे पर पहले भी सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी एसिड अटैक मामलों में कड़े कदम उठाने की बात कह चुका है। अदालत ने कई मामलों में हमलावरों की संपत्ति जब्त कर पीड़ितों को मुआवजा देने जैसे सुझाव भी दिए हैं। न्यायालय का ताजा निर्देश पीड़ितों के आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

SHUKDEV PRASAD

Related News