H-1B वीजा वालों को ‘बंधुआ मजदूर’ कहकर घिरे जेडी वेंस, बोले-‘मेरी भाषा सही नहीं थी, मुझे अपने भारतीय सास-ससुर से प्यार है''
punjabkesari.in Sunday, Oct 18, 2026 - 06:44 PM (IST)
Washington: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा धारकों को ‘विदेशी बंधुआ मजदूर’ कहने वाले अपने बयान पर सफाई दी है। उन्होंने माना कि उनकी भाषा सही नहीं रही हो सकती है, लेकिन कहा कि उनका निशाना विदेशी कर्मचारी नहीं, बल्कि वे कंपनियां और व्यवस्था हैं, जिनके जरिए अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी पेशेवरों को रखने का आरोप लगाया जाता है। वेंस ने अपनी बात समझाने के लिए पत्नी उषा वेंस के परिवार का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उनके सास-ससुर दक्षिण भारत से अमेरिका आए थे और उनकी बेटी उषा अमेरिका में पैदा हुईं, जो आज देश की सेकंड लेडी हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी पत्नी पर गर्व है और वह उनसे बहुत प्यार करते हैं।
‘मेरी भाषा गलत रही तो जिम्मेदारी मेरी’
सीबीएस न्यूज के कार्यक्रम ‘थिंग्स दैट मैटर-अ टाउन हॉल विद वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस’ के दौरान एक भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक ने उनसे उनके पुराने बयान पर सवाल किया। निव अगरम ने कहा कि अमेरिका में प्रवासन को लेकर उनकी चिंताएं सीमा सुरक्षा, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों से जुड़ी थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि अप्रवासियों को नौकरियां छीनने वाला बताने से उनके प्रति असुरक्षा और अविश्वास बढ़ सकता है। इसके जवाब में वेंस ने कहा, “अगर मेरी भाषा यहां सही नहीं रही, तो इसकी जिम्मेदारी मेरी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी भी अप्रवासी को नीचा दिखाना नहीं था। उनका तर्क था कि विवाद विदेशी कर्मचारियों के खिलाफ नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था के खिलाफ है जिसमें कंपनियों को कर्मचारियों पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण मिल जाता है।
H-1B कर्मचारियों को ‘बंधुआ मजदूर’ क्यों कहा था?
वेंस के मुताबिक, H-1B वीजा पर काम करने वाले विदेशी पेशेवर की नौकरी और अमेरिका में रहने की स्थिति आपस में जुड़ी होती हैं। यदि कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो उसे अमेरिका में अपना प्रवास जारी रखने के लिए दूसरी नौकरी या अन्य वैध विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इस निर्भरता का फायदा कुछ कंपनियां उठा सकती हैं। यदि कोई बड़ी कंपनी अमेरिकी कर्मचारी को हटाकर विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करती है और विदेशी कर्मचारी नौकरी खोने के डर से अपने नियोक्ता के खिलाफ आवाज नहीं उठा पाता, तो इससे कर्मचारियों के बीच असमानता पैदा हो सकती है।
वेंस ने कहा कि उनकी आलोचना इसी व्यवस्था के खिलाफ थी। हालांकि, H-1B वीजा धारकों की स्थिति को ‘बंधुआ मजदूरी’ से जोड़ने वाली उनकी भाषा पर भारत में भी आपत्ति जताई गई थी।
अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों पर कायम वेंस
वेंस ने एक बड़ी कंपनी का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई कंपनी दावा करती है कि उसे योग्य अमेरिकी लेखाकार नहीं मिल रहा, जबकि वह पहले से काम कर रहे अमेरिकी कर्मचारी को हटाकर विदेश से किसी व्यक्ति को नियुक्त कर रही है, तो इस व्यवस्था पर सवाल उठना चाहिए। उनका कहना है कि अमेरिकी कंपनियों को विदेशी प्रतिभाओं का स्वागत करने और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने के बीच संतुलन बनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में लोगों के तेजी से आने से देश की सामाजिक संरचना और सामुदायिक जुड़ाव में बदलाव हो सकता है।
भारत ने भी जताई थी कड़ी आपत्ति
वेंस के पुराने बयान पर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी आपत्ति जताई थी। मंत्रालय ने विदेशी पेशेवरों के लिए ‘बंधुआ मजदूर’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को अनुचित और बेहद अपमानजनक बताया था। भारत ने कहा था कि भारतीय पेशेवर अमेरिका की अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्षेत्र और नवाचार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इस विवाद के बीच वेंस की ताजा सफाई में दो बातें सामने आई हैं उन्होंने अपनी भाषा को लेकर जिम्मेदारी स्वीकार की है, लेकिन H-1B व्यवस्था और अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों को लेकर अपनी मूल चिंता वापस नहीं ली है।
