समुद्री ताकत में भारत का बड़ा कदम, 200 युद्धपोतों वाली नौसेना बनाने की तैयारी
punjabkesari.in Tuesday, Jul 28, 2026 - 12:30 PM (IST)
International Desk: हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों के बीच भारत ने अपनी समुद्री ताकत को तेजी से बढ़ाने की रणनीति पर काम तेज कर दिया है। भारतीय नौसेना का लक्ष्य वर्ष 2035 तक 200 से अधिक युद्धपोतों का बेड़ा तैयार करना है। इस दिशा में हाल ही में स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत INS मालवन को नौसेना में शामिल किया गया है। INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है और इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने लगभग 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ किया है। यह नीलगिरि श्रेणी का छठा युद्धपोत है, जबकि सातवां जहाज INS विंध्यगिरि भी जल्द शामिल होगा। इसके अलावा प्रोजेक्ट-17 ब्रावो के तहत अगली पीढ़ी के 7 से 8 युद्धपोतों की योजना पर भी काम चल रहा है।
Every warship has a journey.#Mahendragiri’s began with indigenous design and the craftsmanship that shaped her.
— SpokespersonNavy (@indiannavy) July 11, 2026
As the sixth Project 17A Nilgiri-class frigate prepares for commissioning, today #11Jul 26, witness the making of a frontline combatant built for the Navy of… pic.twitter.com/C4lFtCALAY
150 से बढ़कर 200 युद्धपोतों का लक्ष्य
फिलहाल भारतीय नौसेना के पास लगभग 150 जहाज हैं, जिनमें करीब 135 फ्रंटलाइन युद्धपोत शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 50 नए जहाज निर्माणाधीन हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गति को देखते हुए 2035 तक 200 युद्धपोतों का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।भारतीय नौसेना ने नए जहाजों की तैनाती की रफ्तार बढ़ा दी है। वर्तमान में औसतन हर छह सप्ताह में एक नया युद्धपोत नौसेना में शामिल किया जा रहा है। पिछले डेढ़ महीने में ही पांच स्वदेशी जहाजों को सेवा में शामिल किया गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार चीन के पास 370 से अधिक युद्धपोतों वाला दुनिया का सबसे बड़ा नौसैनिक बेड़ा है, जिसमें आधुनिक विमानवाहक पोत, विध्वंसक और पनडुब्बियां शामिल हैं। वहीं पाकिस्तान चीन से हंगोर श्रेणी की आठ आधुनिक अटैक पनडुब्बियां हासिल कर रहा है, जिससे हिंद महासागर में भारत की सुरक्षा चुनौतियां बढ़ गई हैं।
2047 तक पूर्ण आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य
भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक जहाज निर्माण और उसके प्रमुख उपकरणों में विदेशी निर्भरता को न्यूनतम करना है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी विशेष स्टील, सेंसर, हथियार प्रणाली और इंजन जैसी तकनीकों के लिए भारत को फ्रांस, जापान, अमेरिका, रूस और इजराइल जैसे देशों के साथ तकनीकी सहयोग की आवश्यकता रहेगी।हाल ही में भारत और जापान ने यूनिकॉर्न स्टेल्थ मास्ट तकनीक के संयुक्त विकास पर समझौता किया है। यह तकनीक भारतीय युद्धपोतों को दुश्मन के रडार से बचाने में मदद करेगी। इसके अलावा जापान ने भारत में अपनी मोगामी श्रेणी की फ्रिगेट के संयुक्त निर्माण का भी प्रस्ताव दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए भारत को भविष्य में दो पूर्ण रूप से सक्षम नौसैनिक बेड़े तैयार रखने होंगे। इसी रणनीति के तहत स्वदेशी युद्धपोत निर्माण और नौसेना के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
