रूस से 5 अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन खरीदने की तैयारी में भारत, एयर डिफेंस नेटवर्क होगा और मजबूत
punjabkesari.in Monday, Mar 02, 2026 - 09:51 PM (IST)
नेशनल डेस्क: भारत अपनी वायु सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करने के लिए रूस से S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम के पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन खरीदने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। यह फैसला हालिया सैन्य अनुभवों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है। रूस का उन्नत S-400 सिस्टम, जिसे भारतीय परिप्रेक्ष्य में ‘सुदर्शन चक्र’ के रूप में भी जाना जाता है, लंबी दूरी तक दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोन, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की क्षमता रखता है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा भरोसा
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम ने अपनी प्रभावशीलता साबित की थी। भारतीय वायु सेना के अनुसार, इस प्रणाली ने लंबी दूरी से हवाई लक्ष्यों को इंटरसेप्ट करने में अहम भूमिका निभाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिस्टम ने 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर कई हवाई खतरों को निष्क्रिय किया। इस ऑपरेशन के बाद S-400 को भारतीय वायु रक्षा तंत्र में “गेम-चेंजर” माना जाने लगा।
पूर्वी और पश्चिमी मोर्चों पर तैनाती की योजना
सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय जल्द ही भारतीय वायु सेना के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है। अतिरिक्त स्क्वाड्रनों को चीन सीमा और पाकिस्तान सीमा दोनों क्षेत्रों में रणनीतिक रूप से तैनात करने की योजना है, ताकि मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम और मजबूत हो सके।
मौजूदा डील और आगे की रणनीति
भारत ने 2018 में रूस के साथ लगभग 5.4 अरब डॉलर के समझौते के तहत पांच S-400 स्क्वाड्रन खरीदने का अनुबंध किया था। इनमें से तीन पहले ही ऑपरेशनल हो चुके हैं, जबकि शेष दो की डिलीवरी 2026 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। अब अतिरिक्त पांच स्क्वाड्रनों के लिए बातचीत आगे बढ़ रही है। साथ ही बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर मिसाइलों की खरीद की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।
स्वदेशी परियोजना पर भी काम जारी
इसी बीच Defence Research and Development Organisation (DRDO) अपनी लंबी दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली ‘प्रोजेक्ट कुशा’ पर काम कर रहा है। हालांकि, फिलहाल रणनीतिक जरूरतों को देखते हुए S-400 पर निर्भरता बनी हुई है। S-400 ट्रायम्फ सिस्टम रूस की कंपनी Almaz-Antey द्वारा विकसित किया गया है और इसे दुनिया के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है।
रणनीतिक महत्व
चीन और पाकिस्तान के साथ बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच यह संभावित सौदा भारत की वायु रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई दे सकता है। इससे देश की सीमाओं पर निगरानी, इंटरसेप्शन और जवाबी कार्रवाई की क्षमता और मजबूत होगी।
