ट्रंप ने 90वीं बार अलापा रागः भारत-पाकिस्तान युद्ध मैने रुकवाया, भारत ने फिर लगाई फटकार- अब बस भी करो झूठ...
punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 11:16 AM (IST)
Washington: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर यह दावा दोहराया कि उन्होंने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव को शुल्क (टैरिफ) के जरिए रोक दिया था जो उनके अनुसार परमाणु युद्ध में बदल सकता था। ट्रंप ने मंगलवार को 'फॉक्स बिजनेस' को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ''मैंने आठ युद्ध रुकवाए। इन आठ युद्धों में से कम से कम छह शुल्क के कारण सुलझे। मैंने कहा कि अगर आप यह युद्ध नहीं रोकते हैं तो मैं आप पर शुल्क लगा दूंगा क्योंकि मैं नहीं चाहता कि लोग मारे जाएं।''
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने इस दावे को 1 साल May 2025- Feb 2026 तक 80 से अधिक बार दोहराया है । उद्योग विश्लेषकों के अनुसार अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स और आयोजनों पर ट्रंप ने इसे लगभग 90 बार तक दोहराया बताया है। यानि ट्रम्प ने लगभग 60–90 बार तक यह दावा दोहराया है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध/संघर्ष को टैरिफ की धमकी से रोका ।अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा, ''और उन्होंने कहा, 'इसका इससे क्या लेना-देना?' मैंने कहा, 'आप पर शुल्क लगाया जाएगा।' जैसे भारत और पाकिस्तान। मेरे विचार में यह एक परमाणु युद्ध में बदल सकता था। वे वास्तव में युद्ध की ओर बढ़ रहे थे, 10 विमान मार गिराए गए थे।''
ट्रंप ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा था, ''राष्ट्रपति ट्रंप ने हमें लड़ाई रोकने के लिए राजी करके कम से कम एक करोड़ लोगों की जान बचाई।'' ट्रंप ने कहा, ''मेरे विचार में वे परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रहे थे। शुल्क के बिना युद्ध रुकवाना संभव नहीं होता।'' ट्रंप ने पिछले साल 10 मई से लेकर अब तक कई बार भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने का दावा किया है।
उन्होंने 10 मई को सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वाशिंगटन की मध्यस्थता में हुई बातचीत के बाद दोनों पड़ोसी देशों ने सैन्य टकराव को ''पूर्ण और तत्काल'' रोकने पर सहमति जताई। भारत ने किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से लगातार इनकार किया है। भारत ने कहा कि ये दावे झूठ हैं और ट्रंप को अब और झूठ नहीं बोलना चाहिए। भारत ने पिछले साल सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे।
