Heart Attack: प्रेग्नेंसी के दौरान हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

punjabkesari.in Monday, Feb 16, 2026 - 05:06 PM (IST)

नेशनल डेस्क: गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का बेहद खास और भावनात्मक दौर होता है। इस समय वह अपने आने वाले बच्चे का इंतजार करती है, लेकिन यह अवधि जितनी सुखद मानी जाती है, उतनी ही शारीरिक चुनौतियों से भरी भी हो सकती है। हाल के अध्ययनों में यह सामने आया है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में दिल से जुड़ी समस्याओं, खासकर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। पहले यह धारणा थी कि गर्भवती महिलाएं अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती हैं और उन्हें दिल के दौरे का खतरा बहुत कम होता है, लेकिन नए आंकड़े इस सोच को बदलते दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम इस स्थिति को प्रभावित कर रहे हैं।

आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
हालिया आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में भारत में हर एक लाख महिलाओं में से लगभग 88 की मृत्यु गर्भावस्था या डिलीवरी से जुड़ी जटिलताओं के कारण दर्ज की गई। कुल मिलाकर यह संख्या करीब 22,500 तक पहुंचती है। यदि हार्ट अटैक के मामलों पर ध्यान दें, तो अनुमान है कि हर एक लाख डिलीवरी में लगभग 3 महिलाओं को हार्ट अटैक का सामना करना पड़ा। यह संख्या भले ही कम लगे, लेकिन पहले ऐसे मामले बेहद दुर्लभ माने जाते थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब गर्भावस्था के दौरान दिल से जुड़ी समस्याएं पूरी तरह असामान्य नहीं रहीं। अनुमान है कि हर 100 गर्भवती महिलाओं में से 1 से 4 को किसी न किसी प्रकार की कार्डियक समस्या हो सकती है। गंभीर स्थिति में यह मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, जिससे समय से पहले प्रसव या बच्चे के विकास पर असर पड़ सकता है।

क्यों बढ़ रहा है खतरा
डॉक्टरों के मुताबिक कई कारण इस बढ़ते जोखिम से जुड़े हो सकते हैं। अधिक उम्र में गर्भधारण, विशेषकर 35 वर्ष के बाद, दिल की बीमारियों की संभावना को बढ़ा देता है। इसके अलावा मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, कम शारीरिक सक्रियता और आईवीएफ जैसी परिस्थितियां भी शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है और दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है ताकि मां और भ्रूण दोनों की जरूरतें पूरी हो सकें। यही अतिरिक्त दबाव कई बार दिल से जुड़ी समस्याओं की वजह बन सकता है।


लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें
गर्भावस्था में हार्ट अटैक के लक्षण सामान्य लोगों से अलग या कम स्पष्ट हो सकते हैं। सांस फूलना, असामान्य थकान, चक्कर आना, मतली, ज्यादा पसीना, ऊपरी पेट या पीठ में दर्द जैसे संकेत सामने आ सकते हैं। कई महिलाएं इन्हें सामान्य गर्भावस्था की परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे किसी भी लक्षण को महसूस करने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच और उपचार से मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

 


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Content Editor

Mansa Devi

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