अगर NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिले तो कौन जीतता है चुनाव? जानिए क्या कहता है नियम
punjabkesari.in Monday, Apr 06, 2026 - 04:09 PM (IST)
नेशनल डेस्क : पश्चिम बंगाल सहित भारत के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव जारी हैं। इन चुनावों में वोटिंग करते समय EVM पर एक विशेष विकल्प भी नजर आता है जिसे NOTA (None of the Above) कहा जाता है। यह विकल्प मतदाताओं को सभी उम्मीदवारों को खारिज करने का अधिकार देता है। लेकिन सवाल यह है कि अगर नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिल जाए तो क्या होता है? क्या चुनाव रद्द हो जाता है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
NOTA क्या है?
NOTA का मतलब होता है 'इनमें से कोई नहीं।' यह विकल्प मतदाताओं को अपने असंतोष को व्यक्त करने का माध्यम देता है। यानी अगर कोई मतदाता किसी भी उम्मीदवार को समर्थन नहीं देना चाहता, तो वह NOTA का चुनाव कर सकता है। ध्यान रहे कि भारत की चुनाव प्रणाली में नोटा को वास्तविक उम्मीदवार के रूप में नहीं माना जाता। इसका मतलब यह है कि नोटा वोट किसी व्यक्ति को विजेता बनाने में सीधे तौर पर भूमिका नहीं निभाते।
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अगर नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिल जाए
यदि किसी सीट पर नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, तब भी चुनाव रद्द नहीं होता। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, नोटा के लिए डाले गए वोट विजेता तय करने में वैध नहीं माने जाते। इस स्थिति में जो उम्मीदवार दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा वोट प्राप्त करता है, वही विजेता घोषित किया जाता है। आसान शब्दों में कहें तो नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिलने के बावजूद वास्तविक उम्मीदवार जीत जाता है।
चुनाव रद्द नहीं होता
लोकसभा या विधानसभा चुनाव में नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिलने पर भी चुनाव रद्द नहीं होते। राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कोई कानून नहीं है जो नोटा के बहुमत को चुनाव रद्द करने की अनुमति देता हो।हालांकि, कुछ राज्यों जैसे महाराष्ट्र और हरियाणा में स्थानीय निकाय चुनावों में, यदि नोटा को बहुमत मिलता है तो दोबारा चुनाव कराए जाने की व्यवस्था है।
नोटा का उद्देश्य
NOTA को 2013 के PUCL बनाम भारत संघ फैसले के बाद पेश किया गया। इसका मकसद मतदाताओं को अपनी असहमति और असंतोष जाहिर करने का अवसर देना है। हालांकि नोटा सीधे तौर पर चुनाव के नतीजों को बदल नहीं सकता, लेकिन इसके ज्यादा वोट राजनीतिक दलों को जनता की असंतोषपूर्ण भावना का संदेश देते हैं।
कानूनी बहस
NOTA को लेकर अभी भी कानूनी बहस चल रही है। 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में याचिका पर जवाब मांगा। याचिका में यह मांग की गई थी कि यदि नोटा को बहुमत मिले, तो चुनाव रद्द किए जाएं और अस्वीकार किए गए उम्मीदवारों को दोबारा चुनाव लड़ने से रोका जाए। हालांकि, अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं आया है और मौजूदा नियम लागू हैं।
