दिल्ली में गाड़ियां कम...जाम ज्यादा! 66 लाख वाहन हटने के बाद भी क्यों थमी रफ्तार? जानें असली वजह
punjabkesari.in Thursday, Mar 26, 2026 - 10:37 AM (IST)
नेशनल डेस्क: राजधानी दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। इसी दिशा में एक बड़ा अभियान चलाते हुए मार्च 2026 तक 66 लाख से अधिक पुराने वाहनों को रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से हटा दिया गया है। हालांकि, इस कार्रवाई के बावजूद शहर में कुल वाहनों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है, जो चिंता का विषय बन गई है।
पुराने वाहनों के खिलाफ तेज कार्रवाई
सरकार ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पुराने वाहनों पर कड़ा रुख अपनाया है। नियमों के अनुसार 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहन और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को हटाया जा रहा है। इसी नियम के तहत बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए लाखों वाहनों को रिकॉर्ड से हटाया गया। इस कदम का मुख्य उद्देश्य हवा की गुणवत्ता सुधारना और प्रदूषण के स्तर को कम करना है।
नई गाड़ियों की एंट्री से बढ़ा दबाव
हालांकि पुराने वाहनों को हटाने के बाद भी सड़कों पर वाहनों की भीड़ कम नहीं हुई है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, दिल्ली में कुल पंजीकृत वाहनों की संख्या बढ़कर लगभग 87.6 लाख हो गई है। यह आंकड़ा बताता है कि जितनी तेजी से पुराने वाहन हटाए जा रहे हैं, उससे अधिक संख्या में नए वाहन सड़कों पर आ रहे हैं।
दोपहिया वाहन सबसे आगे
दिल्ली में दोपहिया वाहनों का दबदबा अभी भी कायम है। बाइक और स्कूटर लोगों की सबसे पसंदीदा सवारी बने हुए हैं, क्योंकि ये सस्ते और सुविधाजनक होते हैं। इसके बाद कार और अन्य निजी वाहन आते हैं। वहीं, माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े वाहनों की संख्या में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट की धीमी प्रगति
बस और टैक्सी जैसे सार्वजनिक परिवहन साधनों की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी है। निजी वाहनों के मुकाबले इनकी संख्या में उतनी तेजी से बढ़ोतरी नहीं हो रही। यही कारण है कि लोग अब भी निजी गाड़ियों पर ज्यादा निर्भर हैं, जिससे सड़कों पर भीड़ और प्रदूषण दोनों बढ़ रहे हैं।
महामारी के बाद फिर बढ़ी रफ्तार
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2020–21 तक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। लेकिन 2021–22 में कोरोना महामारी और वाहन स्क्रैपिंग नियमों के कारण इसमें गिरावट आई। इसके बाद स्थिति सामान्य होते ही फिर से वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी।
हर हजार लोगों पर बढ़ीं गाड़ियां
एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अब हर 1000 लोगों पर वाहनों की संख्या पहले से ज्यादा हो गई है। यह इस बात का संकेत है कि लोग सार्वजनिक परिवहन की बजाय निजी वाहनों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
कुल मिलाकर स्थिति यह है कि एक तरफ सरकार पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ निजी वाहनों की बढ़ती मांग इस प्रयास को कमजोर कर रही है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण और बेहतर शहरी योजना दोनों ही सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।
