Brain Tumour Drug: ब्रेन ट्यूमर मात्र 5 दिनों में लगभग गायब, CAR-T सेल थेरेपी का कमाल, जानें इसके बारे में

punjabkesari.in Tuesday, Mar 31, 2026 - 12:21 PM (IST)

Brain Tumour Drug: अमेरिका के Mass General Cancer Center के वैज्ञानिकों ने एक नई CAR-T सेल थेरेपी के जरिए बेहद आक्रामक ब्रेन कैंसर ग्लियोब्लास्टोमा के इलाज में उम्मीद की किरण दिखाई है। साल 2024 में किए गए फेज-1 क्लीनिकल ट्रायल INCIPIENT में शामिल पहले तीन मरीजों में ट्यूमर के आकार में बड़ा बदलाव देखा गया।

यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल The New England Journal of Medicine में प्रकाशित हुई है। इसमें CARv3-TEAM-E नाम की एक नई T-cell therapy का परीक्षण किया गया, जिसे खासतौर पर उन मरीजों के लिए तैयार किया गया है जिनमें ग्लियोब्लास्टोमा दोबारा हो चुका था।

CAR-T थेरेपी में मरीज की अपनी इम्यून कोशिकाओं को लैब में बदलकर कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है। यह तकनीक पहले ब्लड कैंसर में सफल रही है, लेकिन सॉलिड ट्यूमर जैसे ब्रेन कैंसर में इसे लागू करना मुश्किल रहा है। इस नई तकनीक में CAR-T को खास एंटीबॉडी (TEAMs) के साथ मिलाया गया है, ताकि अलग-अलग तरह की कैंसर कोशिकाओं को एक साथ निशाना बनाया जा सके। इस दवा को सीधे दिमाग में इंजेक्ट किया गया, जिससे इसका असर ज्यादा मजबूत हो सके।

तीन मरीजों पर किया ट्रायल
ट्रायल में 57 से 74 साल की उम्र के तीन मरीज शामिल थे, जो पहले ही रेडिएशन और कीमोथेरेपी जैसे इलाज करवा चुके थे। इलाज के कुछ ही दिनों में इन मरीजों में ट्यूमर में तेजी से कमी देखी गई। एक मरीज में ट्यूमर लगभग पूरी तरह खत्म होने जैसा असर दिखा, दूसरे में छह महीने से ज्यादा समय तक 60 प्रतिशत से अधिक कमी बनी रही, जबकि तीसरे मरीज में सिर्फ पांच दिनों के भीतर लगभग पूरा ट्यूमर सिकुड़ गया।

हालांकि इलाज के बाद कुछ सामान्य साइड इफेक्ट्स जैसे बुखार और मानसिक स्थिति में बदलाव देखने को मिले, लेकिन मरीजों ने इसे सहन कर लिया और उन्हें अस्पताल में निगरानी के बाद छुट्टी दे दी गई। शुरुआती अच्छे नतीजों के बावजूद, समय के साथ तीनों मरीजों में फिर से ट्यूमर बढ़ने लगा। इसका एक कारण यह माना गया कि शरीर में CAR-TEAM कोशिकाएं लंबे समय तक सक्रिय नहीं रह पाईं।

अब रिसर्च टीम इस थेरेपी के असर को लंबे समय तक बनाए रखने के तरीकों पर काम कर रही है। इसमें बार-बार डोज देना या कीमोथेरेपी के जरिए पहले से शरीर को तैयार करना जैसे विकल्प शामिल हैं।

यह अध्ययन दिखाता है कि लैब में की गई खोजों को मरीजों तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भले ही यह इलाज अभी पूरी तरह सफल नहीं हुआ है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह कठिन ब्रेन कैंसर के इलाज में भविष्य के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Anu Malhotra

Related News