Harish Rana Death: अलविदा हरीश! AIIMS में थम गईं सांसें... 13 साल तक कोमा में रहने के बाद मिली मुक्ति

punjabkesari.in Tuesday, Mar 24, 2026 - 06:09 PM (IST)

Harish Rana Death: गाजियाबाद के रहने वाले 31 वर्षीय हरीश राणा का दिल्ली के AIIMS अस्पताल में निधन हो गया है। हरीश का मामला भारत के कानूनी इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 'इच्छामृत्यु' की अनुमति मिलने का यह पहला बड़ा मामला बन गया है। 13 साल तक मौत से जंग लड़ने के बाद उन्होंने एम्स के पैलिएटिव केयर वार्ड में अंतिम सांस ली।

कैसे बदली एक होनहार छात्र की जिंदगी?

हरीश राणा की कहानी एक दुखद मोड़ से शुरू हुई थी। साल 2013 में चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हरीश अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे।  इस ऊंचाई से गिरने के कारण उनके सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं, जिससे उनका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया। पिछले 13 वर्षों से हरीश पूरी तरह बेड पर थे। वे न बोल सकते थे, न हिल सकते थे और न ही कुछ महसूस कर सकते थे।

PunjabKesari

क्वाड्रिप्लेजिया और वेंटिलेटर का सहारा

डॉक्टरों ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया नामक स्थिति से पीड़ित घोषित किया था। इस स्थिति में शरीर के चारों अंग काम करना बंद कर देते हैं। हरीश पूरी तरह से वेंटिलेटर और फीडिंग ट्यूब (खाने की नली) पर निर्भर थे। एक ही स्थिति में सालों तक लेटे रहने के कारण उनके शरीर पर गहरे जख्म हो गए थे, जिससे उनकी तकलीफ लगातार बढ़ती जा रही थी। मेडिकल साइंस के अनुसार, उनकी स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं बची थी।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

हरीश की पीड़ा को देखते हुए उनके परिवार ने कानूनी लड़ाई लड़ी। 11 मार्च, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के मामले में 'लिविंग विल' और 'पैसिव यूथेनेशिया' के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए गरिमापूर्ण मृत्यु की अनुमति दी थी। अदालत के आदेश के बाद उन्हें एम्स के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (IRCH) में शिफ्ट किया गया, जहाँ डॉक्टरों की निगरानी में उन्हें लाइफ सपोर्ट से धीरे-धीरे हटाया गया।

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

News Editor

Radhika

Related News