New GST Rate: सस्ती हो जाएगी आपकी फेवरेट चॉकलेट, पेस्ट्री और आइसक्रीम, 18% से 5% हो सकती है टैक्स दर
punjabkesari.in Friday, Aug 29, 2025 - 12:32 PM (IST)

नेशनल डेस्क: त्योहारी सीजन से पहले आम जनता को बड़ी राहत मिल सकती है। GST काउंसिल की अगली बैठक में चॉकलेट, पेस्ट्री, और आइसक्रीम पर GST Rate को 18% से घटाकर 5% करने पर विचार किया जा रहा है। अगर इन नई दरों को लागू किया जाता है तो इससे इन लोकप्रिय खाद्य पदार्थों की कीमतें काफी कम हो जाएंगी, जिससे ग्राहकों की जेब पर बोझ घटेगा।
फिटमेंट कमेटी की सिफारिश
'GST 2.0' reforms के तहत जीएसटी फिटमेंट कमेटी ने सिफारिश की है कि कोको युक्त चॉकलेट, अनाज से बने फ्लेक्स, पेस्ट्री और आइसक्रीम को 18% के बजाय 5% GST स्लैब में रखा जाए। इन उत्पादों की बच्चों और युवाओं में काफी मांग है और इनकी कीमतें घटने से उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर फायदा होगा। यह कदम खासकर अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में भी इन उत्पादों की पहुंच बढ़ा सकता है।
ये भी पढ़ें- राहुल की रैली में PM मोदी की मां पर 'अपमानजनक' टिप्पणी पर भड़के अमित शाह, बोले- देश माफ नहीं करेगा!
क्यों हो रहा है यह बदलाव?
सरकार का उद्देश्य जीएसटी ढांचे में सुधार और इसे सरल बनाना है। फिलहाल 18% जीएसटी स्लैब से सरकार को अच्छा राजस्व मिलता है, लेकिन सरकार का लक्ष्य रोजमर्रा के उपभोग की वस्तुओं पर टैक्स का बोझ कम करना है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों का मानना है कि खाद्य पदार्थों पर जीएसटी दरें कम करने से महंगाई का दबाव भी कम होगा।
56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि फिटमेंट कमेटी की ये सिफारिशें अभी अंतिम नहीं हैं। इन पर 3 और 4 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में सलाह की जाएगी। अगर काउंसिल इन सिफारिशों को मंजूरी देती है, तो कीमतों में कमी का रास्ता साफ हो जाएगा। वहीं वित्त मंत्रालय के सूत्रों का अनुमान है कि इस बदलाव से केंद्र और राज्य सरकारों को करीब 40,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है।
ये भी पढ़ें- PM Modi Japan Visit: संबोधन के दौरान जापानी निर्माताओं से बोले PM मोदी- 'भारत आएं, दुनिया के लिए बनाएं'
पीएम मोदी ने किया था जीएसटी सुधार का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से जीएसटी में सुधार का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि दिवाली से पहले नया जीएसटी रिफॉर्म लाया जाएगा, जिसमें मौजूदा दरों की समीक्षा और टैक्स स्लैब को तर्कसंगत बनाया जाएगा। यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।