Gold/Silver ETF: ना चोरी का डर, ना शुद्धता की टेंशन, यहां करें सोने-चांदी में सुरक्षित निवेश
punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 10:27 AM (IST)
नेशनल डेस्क: अगर आप आज भी सोना-चांदी खरीदने के लिए सुनार की दुकान के चक्कर लगाते हैं या घर में उनकी सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद रहते हैं, तो अब वक्त आ गया है अपनी सोच बदलने का। साल 2026 में निवेश के आधुनिक तरीकों ने कीमती धातुओं में पैसा लगाने का अंदाज पूरी तरह बदल दिया है। अब आपको न तो शुद्धता की चिंता करने की जरूरत है और न ही भारी-भरकम मेकिंग चार्जेस देने की। गोल्ड और सिल्वर ETF (Exchange-Traded Funds) ने धातु में निवेश को उतना ही आसान बना दिया है जितना मोबाइल से रिचार्ज करना।
क्या है यह डिजिटल धातु का खेल?
सरल शब्दों में कहें तो Gold और Silver ETF एक तरह के Mutual Fund हैं जो सीधे तौर पर शुद्ध सोने और चांदी की कीमतों पर आधारित होते हैं। जब आप इनका एक Unit खरीदते हैं, तो आप असल में बाजार भाव पर उतनी ही वैल्यू की धातु के मालिक बन जाते हैं। ये Share Market (NSE/BSE) पर लिस्टेड होते हैं, जिन्हें आप अपने डीमैट अकाउंट के जरिए कभी भी खरीद या बेच सकते हैं।
पुरानी दिक्कतों का मॉडर्न समाधान
सिक्के या गहने खरीदने के पुराने तरीके में कई सिरदर्द थे-जैसे लॉकर का किराया, चोरी का डर और बेचते वक्त मिलने वाला कम दाम। लेकिन ETF इन सब झंझटों को खत्म कर देते हैं। यहां आपकी धातु बैंकों के पास पूरी तरह सुरक्षित रहती है। आपको न तो GST की चिंता करनी है और न ही शुद्धता की जांच करानी है। सबसे बड़ी बात यह है कि आप महज ₹500 जैसी छोटी राशि से भी अपना निवेश शुरू कर सकते हैं, जो physical gold खरीदने में मुमकिन नहीं है।
शानदार रिटर्न और टैक्स का फायदा
मौजूदा समय यानी 2026 के आंकड़ों पर गौर करें तो ग्लोबल हलचलों के बीच सोने ने जहां करीब 15-16% का स्थिर रिटर्न दिया है, वहीं चांदी ने 35-40% तक की छलांग लगाकर सबको हैरान कर दिया है। टैक्स के मोर्चे पर भी ये काफी किफायती हैं; एक साल से ज्यादा निवेश रखने पर आपको सिर्फ 12.5% का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होता है, और वेल्थ टैक्स जैसी कोई लायबिलिटी नहीं बनती।
पोर्टफोलियो का 'सुरक्षा कवच'
जानकार मानते हैं कि जब शेयर बाजार में उथल-पुथल मचती है, तब सोना और चांदी आपके पोर्टफोलियो को डूबने से बचाते हैं। अपने कुल निवेश का कम से कम 8-10% हिस्सा इन ETF में रखना एक समझदारी भरा फैसला माना जाता है। यह न सिर्फ आपके जोखिम को कम करता है बल्कि महंगाई के खिलाफ एक मजबूत ढाल भी तैयार करता है।
